संगीत सोम vs अतुल प्रधान जब सियासी जंग पहुँच गई 'मीट फैक्ट्री' और निजी रिश्तों के दावों तक

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News India Live, Digital Desk : पश्चिमी यूपी की राजनीति को जो लोग करीब से जानते हैं, उन्हें पता है कि अतुल प्रधान और संगीत सोम की अदावत कोई नई नहीं है। लेकिन इस बार अतुल प्रधान ने संगीत सोम पर एक ऐसा आरोप लगाया है जो सीधे तौर पर उनकी छवि पर हमला करता है।

अतुल प्रधान ने हाल ही में मीडिया और जनता के सामने यह बात रखी कि जो संगीत सोम बाहर खुद को हिंदुत्व का सबसे बड़ा रक्षक और मुस्लिम कट्टरवाद का विरोधी बताते हैं, हकीकत में उनके व्यापारिक हित कुछ और ही कहानी बयाँ करते हैं।

मीट बिजनेस और व्यापारिक रिश्तों का 'पर्दाफाश'?
अतुल प्रधान का सीधा दावा है कि संगीत सोम मांस (Meat) के बड़े कारोबार से जुड़े हुए हैं। इतना ही नहीं, अतुल ने यहाँ तक कह दिया कि उनके बिजनेस पार्टनर्स में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हैं। अतुल प्रधान का तर्क ये है कि अगर किसी का व्यक्तिगत बिजनेस किसी के साथ भी है, तो यह उसका अपना मामला है, लेकिन "दोहरा चेहरा" (Double Standard) नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ आप व्यापारिक लाभ के लिए साथ खड़े हैं और दूसरी तरफ जनता के बीच वोट के लिए नफरत फैलाते हैं।

व्यापारी बनाम राजनेता
सपा विधायक ने अपनी बातचीत में संगीत सोम को 'नेता' के बजाय एक 'व्यापारी' करार दिया। उनका कहना है कि राजनीति समाजसेवा के लिए होती है, न कि जनता को धर्म के नाम पर बांटकर खुद का कारोबार चमकाने के लिए। पश्चिमी यूपी की जनता अब इन चीजों को समझ रही है।

मामले की गहराई: क्यों है यह मुद्दा संवेदनशील?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खास तौर पर मेरठ, मुजफ्फरनगर और सरधना का इलाका राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ धर्म और पहचान की राजनीति काफी प्रभाव डालती है। ऐसे में जब किसी नेता की 'कथनी और करनी' में फर्क होने के दावे किए जाते हैं, तो उसका असर उनके समर्थक बेस (Base) पर पड़ सकता है।

अभी तक की प्रतिक्रिया
जैसे-जैसे यह बयान वायरल हो रहा है, राजनीतिक गलियारों में अटकलें बढ़ गई हैं। जहाँ सपा समर्थक इसे संगीत सोम की 'पोल खोलना' बता रहे हैं, वहीं भाजपा खेमे से अभी इसका पुरजोर जवाब आना बाकी है। अक्सर संगीत सोम इन बातों को अफवाह या राजनैतिक साजिश करार देते रहे हैं, लेकिन अतुल प्रधान ने जिस बेबाकी से यह मुद्दा उठाया है, उससे फिलहाल सरधना का सियासी पारा चढ़ा हुआ है।