Purnima 2026 : फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण जानें व्रत की सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
News India Live, Digital Desk: साल 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत और होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ उदय होगा, लेकिन साथ ही साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का समय इस प्रकार है:
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 2 मार्च 2026, रात 09:12 बजे से
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 3 मार्च 2026, रात 11:41 बजे तक
पूर्णिमा व्रत और होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
स्नान-दान की पूर्णिमा: 3 मार्च 2026
साल का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2026)
3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा।
ग्रहण का समय: यह ग्रहण भारतीय समयानुसार शाम को शुरू होगा।
सूतक काल: चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। चूंकि यह ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए सूतक के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। (सूतक काल में पूजा-पाठ और भोजन वर्जित माना जाता है)।
स्नान-दान और पूजा का महत्व
पूर्णिमा के दिन कुछ विशेष कार्यों को करने से लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है:
पवित्र नदी में स्नान: यदि संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है।
सत्यनारायण कथा: इस दिन भगवान विष्णु की सत्यनारायण कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत फलदायी होता है।
चंद्र देव को अर्घ्य: रात के समय चांदी के पात्र में दूध और जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है।
दान का महत्व: ग्रहण समाप्त होने के बाद सफेद वस्तुओं (जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र) का दान करना कुंडली में चंद्रमा को मजबूत करता है।
होलिका दहन और भद्रा का साया
3 मार्च को होलिका दहन के समय 'भद्रा' की स्थिति को देखना महत्वपूर्ण होता है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में होलिका दहन अशुभ माना जाता है। इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम के समय ग्रहण और भद्रा की गणना के आधार पर तय किया जाएगा।