Ramadan 2026 : सिर्फ भूख-प्यास का नाम नहीं है रोज़ा पेट के साथ आंख, कान और जुबान का भी होता है उपवास

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News India Live, Digital Desk: रमजान का मुबारक महीना इबादत, सब्र और शुक्र का महीना है। इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक 'रोज़ा' रखना हर तंदुरुस्त मुसलमान पर फर्ज है। लेकिन बहुत से लोग रोज़े को केवल खाने-पीने से परहेज समझते हैं। हकीकत में, एक मुकम्मल रोज़ा वह है जिसमें इंसान के शरीर का हर अंग अल्लाह की इबादत में हो और बुराई से दूर रहे।

क्या है 'अंगों का रोज़ा'?

इस्लामिक विद्वानों के मुताबिक, रोज़ेदार को इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए:

आंखों का रोज़ा: किसी भी गैर-मह्रम (अजनबी) या बुरी चीज को न देखना।

कानों का रोज़ा: गीबत (चुगली), बुराई या फिजूल बातें न सुनना।

जुबान का रोज़ा: झूठ न बोलना, किसी को गाली न देना और न ही किसी का दिल दुखाना।

पेट का रोज़ा: हराम कमाई से परहेज करना और सहरी से इफ्तार तक कुछ न खाना-पीना।

हाथ-पांव का रोज़ा: किसी पर जुल्म न करना और गलत रास्ते पर न चलना।

रोज़ा रखने की नीयत (सहरी की दुआ)

जब आप सहरी (सुबह का खाना) खा लें, तो रोज़े की नीयत करना जरूरी है। बिना नीयत के रोज़ा मुकम्मल नहीं माना जाता।

दुआ: नवैतु अन असुमा गदन लिल्लाहि तआला मिन शरी रमजान। तर्जुमा: "मैंने अल्लाह के लिए रमजान के कल के रोज़े की नीयत की।"

रोज़ा खोलने की दुआ (इफ्तार की दुआ)

सूरज डूबने के बाद जब इफ्तार का वक्त हो जाए, तो खजूर या पानी से रोज़ा खोलते समय यह दुआ पढ़ें

दुआ: अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु व बिका आमंतु व अलैका तवक्कलतु व अला रिज़किका अफ्तरतु। तर्जुमा: "ऐ अल्लाह! मैंने तेरे ही लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे ही दिए हुए रिज़्क से इफ्तार किया।"

रमजान के तीन अशरे (चरण)

रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिन्हें 'अशरा' कहते हैं:

पहला अशरा (1-10 दिन): रहमत का (अल्लाह की रहमत बरसती है)।

दूसरा अशरा (11-20 दिन): मगफिरत का (गुनाहों की माफी का)।

तीसरा अशरा (21-30 दिन): जहन्नम की आग से निजात (छुटकारे) का।

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