Narasimha Dwadashi 2026 : शत्रुओं पर विजय और संकटों के नाश के लिए इस दिन करें भगवान नरसिंह की पूजा जानें मुहूर्त
News India Live, Digital Desk: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा करने और अधर्मी हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए आधे नर और आधे सिंह के रूप में 'नरसिंह अवतार' लिया था। फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि को भगवान नरसिंह की पूजा करने से न केवल भय और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन के बड़े से बड़े संकट भी टल जाते हैं।
नरसिंह द्वादशी 2026: तिथि और मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, नरसिंह द्वादशी (गोविंद द्वादशी) की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:
द्वादशी तिथि प्रारंभ: 1 मार्च 2026, शाम 06:15 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त: 2 मार्च 2026, दोपहर 03:40 बजे तक
उदयातिथि के अनुसार व्रत: 2 मार्च 2026 (सोमवार) को नरसिंह द्वादशी का व्रत रखा जाएगा।
पूजा का शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 से दोपहर 12:57 बजे तक।
संध्या पूजा: शाम 06:21 से रात 07:35 बजे तक (चूंकि नरसिंह अवतार गोधूलि वेला में हुआ था, इसलिए शाम की पूजा का विशेष महत्व है)।
पूजा विधि (Puja Vidhi)
नरसिंह द्वादशी के दिन इन सरल चरणों में भगवान की आराधना करें:
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ पीले वस्त्र धारण करें।
संकल्प: भगवान नरसिंह की प्रतिमा के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
अभिषेक: भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं।
भोग: उन्हें चंदन, पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। भगवान को ठंडी चीजों का भोग लगाएं (जैसे दही या शरबत) क्योंकि उनका स्वभाव उग्र माना जाता है।
मंत्र जाप: इस दिन "ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥" मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी है।
नरसिंह द्वादशी का महत्व
शत्रु बाधा से मुक्ति: यह व्रत गुप्त शत्रुओं और विरोधियों को शांत करने के लिए किया जाता है।
भय का नाश: जो लोग अज्ञात भय या बुरे सपनों से परेशान हैं, उनके लिए यह पूजा रामबाण है।
कोर्ट-कचहरी में सफलता: कानूनी विवादों में फंसे लोगों को इस दिन नरसिंह स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।