पुणे ब्लास्ट का आरोपी, जिसे कोर्ट ने दी थी जमानत, उसे 'सड़क' पर मिली 'सजा-ए-मौत'! दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या
साल 2012... पुणे की जंगमल्लि महाराज (जेएम) रोड पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे महाराष्ट्र को हिलाकर रख दिया था। इसी केस का एक आरोपी था असलम शब्बीर जहागीरदार, उर्फ बंटी जहागीरदार। जिसे पुलिस और ATS ने बड़ी मुश्किल से पकड़ा था, और जो 2023 से जमानत पर बाहर था।
लेकिन बुधवार का दिन बंटी जहागीरदार की जिंदगी का आखिरी दिन साबित हुआ।
कब्रिस्तान से लौट रहा था, सीने-पेट में मार दीं 3 गोलियां
यह पूरी घटना किसी फिल्मी सीन की तरह हुई।
बंटी जहागीरदार (53 साल) महाराष्ट्र के अहमदनगर (अब अहिल्यानगर) जिले के श्रीरामपुर में अपने एक रिश्तेदार की कब्र पर फातिहा पढ़कर घर लौट रहा था। वह अपने रिश्तेदार की मोपेड पर पीछे बैठा हुआ था।
तभी, बाइक पर आए दो हमलावरों ने उसे निशाना बनाया और उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। तीन गोलियां उसके सीने और पेट में लगीं। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हमलावरों ने खुद किया सरेंडर
दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस की कई टीमें हमलावरों की तलाश में जुट गईं। लेकिन सबको हैरान करते हुए, दोनों हमलावरों ने देर रात खुद शिरडी पुलिस स्टेशन जाकर सरेंडर कर दिया।
कौन था बंटी जहागीरदार? (आतंक से राजनीति तक)
- बंटी कोई मामूली अपराधी नहीं था। 2012 के पुणे बम धमाकों में उस पर आरोप था कि उसने आतंकियों को हथियार मुहैया कराए थे।
- जनवरी 2013 में ATS ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन 2023 से वह जमानत पर बाहर था।
- उसके खिलाफ 1997 से लेकर अब तक 17 से ज्यादा FIR दर्ज थीं।
- इतने गंभीर आरोपों के बावजूद, उसका परिवार स्थानीय राजनीति में काफी सक्रिय था। उसकी मां नगर परिषद की सदस्य रह चुकी थीं, और उसके बाद उसकी भाभी और चचेरा भाई भी चुनाव जीतकर पार्षद बने।
पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है कि यह हत्या किसी पुरानी रंजिश का नतीजा है या इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध की दुनिया का अंत अक्सर ऐसा ही होता है।