Prayagraj Magh Mela : स्लेट-चॉक से होती है भक्तों से बात, 24 सालों से अन्न नहीं, सिर्फ फल और दूध पर जिन्दा हैं ये संत

Post

News India Live, Digital Desk:  हम अपनी ज़िंदगी में इतना बोलते हैं कि कभी-कभी खुद ही शोर से थक जाते हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि कोई इंसान अपनी मर्जी से, बिना किसी दबाव के, पिछले 24 सालों से खामोश हो? इतना ही नहीं, चाहे मई-जून की तपती धूप हो या जनवरी की कंपकंपाने वाली ठंड, उन्होंने कभी पैरों में चप्पल तक नहीं पहनी।

जी हाँ, प्रयागराज के माघ मेले (Magh Mela) में आजकल एक ऐसे ही संत चर्चा का विषय बने हुए हैं। भक्त उन्हें प्यार और श्रद्धा से 'मौनी बाबा' (Mauni Baba) बुलाते हैं।

आइए जानते हैं इनकी कठिन तपस्या और उस अटूट संकल्प के बारे में जो आज के जमाने में किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।

अयोध्या से जुड़ा है संकल्प का तार

मौनी बाबा का असली नाम श्रीराम दास है और ये मूल रूप से संत कबीर नगर के रहने वाले हैं। लेकिन इनकी कर्मभूमि और तपोभूमि अयोध्या और प्रयागराज ही रही है। बात साल 2000-2001 की है। उस समय राम मंदिर आंदोलन को लेकर चर्चाएं गरम थीं। तभी, युवा अवस्था में ही बाबा ने एक कठोर प्रतिज्ञा ले ली थी।

उनका संकल्प था कि जब तक अयोध्या में भव्य राम मंदिर (Ram Mandir) नहीं बन जाता, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और अपने मुख से एक शब्द नहीं बोलेंगे। लोग कहते हैं कि समय बदलता गया, सरकारें बदलती गईं, लेकिन बाबा का संकल्प अडिग रहा।

मंदिर बन गया, पर तपस्या जारी है

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब तो अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है, रामलला विराजमान हो चुके हैं, लेकिन बाबा का 'मौन व्रत' अभी भी नहीं टूटा है। वो आज भी उसी निष्ठा के साथ अपनी साधना में लीन हैं।

उनके करीबियों का कहना है कि बाबा अब अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्व शांति के लिए इस तप को आगे बढ़ा रहे हैं। वो फलाहार (फल) और दूध पर ही जीवित हैं। अन्न का एक भी दाना उन्होंने 24 सालों में नहीं खाया।

कैसे होती है भक्तों से बात?

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर वो बोलते नहीं हैं, तो भक्तों की शंकाओं का समाधान कैसे करते हैं? तो इसका तरीका भी बड़ा ही स्कूल वाला है।
बाबा के पास हमेशा एक स्लेट और चॉक (Slate-Chalk) रहती है। जब भी कोई भक्त अपनी परेशानी लेकर आता है, तो बाबा मुस्कुराते हैं और चॉक उठाकर स्लेट पर उसका समाधान लिख देते हैं। उनकी लिखावट में ही उनका आशीर्वाद होता है।

न सर्दी का डर, न गर्मी की परवाह

माघ मेले में जहां आम इंसान जैकेट और रजाई में ठिठुर रहा होता है, वहां मौनी बाबा को देखकर लोग दंग रह जाते हैं। कड़कड़ाती ठंड में भी वे नग्न पैर (बिना जूतों के) संगम की रेती पर चलते हैं। वे सिर्फ़ एक ऊनी शॉल या साधारण वस्त्र पहनते हैं। यह शारीरिक क्षमता आम इंसान की समझ से परे है, जिसे लोग उनकी 'हठयोग' साधना का नतीजा मानते हैं।

माघ मेले का मुख्य आकर्षण

इन दिनों प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के किनारे लगे शिविर में मौनी बाबा के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। लोग सिर्फ़ उनके दर्शन करने और उनकी खामोशी में छिपी शक्ति को महसूस करने आते हैं।