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March 26 2026 04:19 pm

पाकिस्तान की अमेरिका को सरेआम धौंस होर्मुज जलडमरूमध्य का दिया हवाला, बाइडेन प्रशासन की बोलती बंद करने की कोशिश

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News India Live, Digital Desk : आर्थिक बदहाली और आंतरिक कलह से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका को आंखें दिखाना शुरू कर दिया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का कार्ड खेलते हुए अमेरिका पर तंज कसा है। पाकिस्तान के इस बदले हुए तेवर ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह वही देश है जो अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए बार-बार वाशिंगटन की ओर देखता है।

होर्मुज की 'नब्ज' दबाकर अमेरिका को चिढ़ाया

पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों और सरकारी हल्कों में यह चर्चा तेज है कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों की वैश्विक तेल सप्लाई ठप हो जाएगी। पाकिस्तानी अधिकारियों ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तंज कसते हुए कहा है कि अमेरिका की 'सुपरपावर' वाली छवि इस संकीर्ण समुद्री रास्ते के सामने बौनी साबित हो सकती है। होर्मुज दुनिया का वह रणनीतिक रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है।

ईरान के साथ बढ़ती नजदीकी और अमेरिका से दूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रुख उसकी 'ईरान नीति' में आए बदलाव का संकेत है। हाल ही में ईरान के साथ सीमा विवाद सुलझने के बाद, पाकिस्तान अब तेहरान के साथ खड़े होकर खुद को मुस्लिम जगत के बड़े खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान पर लगाए गए विभिन्न प्रतिबंधों और 'डू मोर' की नीति से झल्लाया इस्लामाबाद अब वाशिंगटन को उसकी कमजोर नस यानी 'एनर्जी सिक्योरिटी' की याद दिलाकर मजे ले रहा है।

बाइडेन प्रशासन के लिए सिरदर्द बना इस्लामाबाद का रवैया

अमेरिका के लिए पाकिस्तान का यह व्यवहार किसी झटके से कम नहीं है। एक तरफ अमेरिका मध्य पूर्व में शांति बहाली की कोशिश कर रहा है, वहीं उसका पुराना सहयोगी पाकिस्तान आग में घी डालने का काम कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, "अमेरिका दूसरों को लोकतंत्र और मानवाधिकार का पाठ पढ़ाता है, लेकिन जब बात होर्मुज की आती है, तो उसके हाथ-पांव फूलने लगते हैं।" यह बयान सीधे तौर पर अमेरिकी विदेश नीति का मजाक उड़ाने जैसा है।

क्या दांव उल्टा पड़ सकता है?

राजनयिक जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान का यह 'मजाक' उसे भारी पड़ सकता है। पाकिस्तान इस समय आईएमएफ (IMF) के कर्ज और अमेरिकी मदद पर निर्भर है। ऐसे में सुपरपावर को चुनौती देना और युद्ध जैसी स्थिति में ईरान का गुणगान करना पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। क्या यह पाकिस्तान की कोई नई सोची-समझी रणनीति है या फिर केवल घरेलू जनता को खुश करने के लिए की गई बयानबाजी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।