डोनाल्ड ट्रंप का विस्फोटक दावा ईरान मुझे बनाना चाहता था अपना सुप्रीम लीडर, मैंने ठुकरा दिया ऑफर
News India Live, Digital Desk: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बेबाक बयानों के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं, लेकिन इस बार उन्होंने जो दावा किया है, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। ट्रंप ने एक चुनावी रैली के दौरान दावा किया कि ईरान (Iran) ने उन्हें अपना 'सुप्रीम लीडर' (सर्वोच्च नेता) बनने का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने सिरे से ठुकरा दिया। ट्रंप के इस विचित्र और हैरान करने वाले दावे के बाद सोशल मीडिया से लेकर व्हाइट हाउस के गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।
'ईरान की हालत खराब, वे मेरी शरण में आना चाहते थे'
डोनाल्ड ट्रंप ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके पिछले कार्यकाल के दौरान ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों की वजह से तेहरान घुटनों पर आ गया था। ट्रंप के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व इतना हताश था कि वे चाहते थे कि ट्रंप ही उनके देश की कमान संभालें और उन्हें संकट से बाहर निकालें। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह प्रस्ताव उन्हें औपचारिक रूप से दिया गया था या यह केवल एक कूटनीतिक बातचीत का हिस्सा था।
अयातुल्ला खामेनेई और ट्रंप के बीच 'जुबानी जंग' का नया अध्याय
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के मौजूदा सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अमेरिका के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। जानकारों का कहना है कि ट्रंप अक्सर अपनी छवि को एक 'ग्रेट नेगोशिएटर' (महान वार्ताकार) के रूप में पेश करने के लिए ऐसे दावे करते रहे हैं। लेकिन 'सुप्रीम लीडर' बनने वाला दावा अब तक का सबसे अजीबोगरीब बयान माना जा रहा है। विरोधियों ने इसे ट्रंप का 'चुनावी स्टंट' करार दिया है।
व्हाइट हाउस में चुप्पी, ईरान ने दी तीखी प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस दावे पर फिलहाल जो बाइडन प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन ईरान के सरकारी मीडिया ने इसे 'हास्यास्पद' और 'मानसिक दिवालियापन' बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप केवल सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह की मनगढ़ंत कहानियां सुना रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस तरह के बयानों के जरिए अमेरिकी मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके डर से दुश्मन देश भी उनके सामने झुकने को तैयार थे।
क्या वाकई मुमकिन है ऐसा प्रस्ताव?
राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि ईरान जैसा इस्लामिक देश, जहां 'सुप्रीम लीडर' का पद धार्मिक और राजनीतिक रूप से सर्वोच्च होता है, वहां किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को यह पद ऑफर करना नामुमकिन जैसा है। हालांकि, ट्रंप के समर्थकों का मानना है कि उनकी 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) की नीति ने ईरान को इतना मजबूर कर दिया था कि वे किसी भी समझौते के लिए तैयार थे। अब सच्चाई क्या है, यह तो केवल ट्रंप और उनके करीबी ही जानते हैं।