Medical Scam: राजस्थान मेडिकल काउंसिल का पूर्व रजिस्ट्रार गिरफ्तार ,फर्जी डॉक्टर बनाने वाले गिरोह के 18 सदस्य धरे गए
News India Live, Digital Desk: राजस्थान में चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाले एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के पूर्व रजिस्ट्रार सहित 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आए छात्रों को बिना परीक्षा पास किए ही फर्जी FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन) सर्टिफिकेट जारी किए और उनके आधार पर राजस्थान में डॉक्टरी करने का लाइसेंस दिलवाया।
कैसे चलता था 'मुन्नाभाई' नेटवर्क?
विदेश (जैसे रूस, चीन, यूक्रेन) से एमबीबीएस करके आने वाले छात्रों के लिए भारत में प्रैक्टिस करने हेतु नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित FMGE परीक्षा पास करना अनिवार्य है।
फर्जी एनओसी (NOC): गिरोह के सदस्य उन छात्रों को निशाना बनाते थे जो इस कठिन परीक्षा को पास नहीं कर पाते थे।
मिलीभगत: पूर्व रजिस्ट्रार और काउंसिल के अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से इन छात्रों के दस्तावेजों में हेरफेर की जाती थी। बिना परीक्षा पास किए ही उन्हें 'क्वालिफाइड' दिखाकर RMC में स्थायी पंजीकरण (Registration) करा दिया जाता था।
एसीबी का 'ऑपरेशन क्लीन': 18 गिरफ्तारियों से हड़कंप
ACB के महानिदेशक के अनुसार, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही निगरानी और इनपुट के बाद की गई है:
मुख्य आरोपी: गिरफ्तार लोगों में RMC के पूर्व रजिस्ट्रार, दो क्लर्क और कई दलाल शामिल हैं जो छात्रों और काउंसिल के बीच कड़ी का काम करते थे।
छात्र भी रडार पर: गिरफ्तार किए गए 18 लोगों में कुछ ऐसे 'डॉक्टर' भी शामिल हैं जो फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे थे।
करोड़ों का लेन-देन: प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एक-एक रजिस्ट्रेशन के बदले 5 से 10 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।
सिस्टम की सुरक्षा में सेंध: रघु शर्मा के आरोपों की पुष्टि?
हाल ही में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भी 'सिस्टम लीकेज' और फर्जी डॉक्टरों को लेकर सरकार को घेरा था। एसीबी की इस कार्रवाई ने उनके दावों पर मुहर लगा दी है।
सत्यापन में चूक: एनबीई (NBE) और मेडिकल काउंसिल के बीच डेटा शेयरिंग और वेरिफिकेशन की कमी का फायदा उठाकर इस गिरोह ने सैकड़ों फर्जी डॉक्टरों को सिस्टम में घुसा दिया।
मरीजों की जान को खतरा: यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का है, क्योंकि अयोग्य लोग डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज कर रहे थे।
आगे क्या? रडार पर 500 से अधिक संदिग्ध फाइलें
एसीबी अब पिछले 5 सालों में हुए सभी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स के रजिस्ट्रेशन की स्क्रूटनी कर रही है।
नोटिस जारी: विभाग ने उन सभी अस्पतालों को अलर्ट भेजा है जहाँ संदिग्ध डॉक्टर तैनात हो सकते हैं।
बड़ी कार्रवाई की उम्मीद: सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों के मालिकों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए नियम (एक नजर में):
| चरण | प्रक्रिया | अनिवार्यता |
|---|---|---|
| 01 | विदेशी विश्वविद्यालय से MBBS | MCI/NMC मान्यता प्राप्त |
| 02 | FMGE परीक्षा (NBE द्वारा) | भारत में प्रैक्टिस हेतु अनिवार्य |
| 03 | इंटर्नशिप | भारत में 1 साल की अनिवार्य ट्रेनिंग |
| 04 | स्टेट मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन | प्रैक्टिस लाइसेंस के लिए अंतिम चरण |