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April 10 2026 03:05 pm

राजस्थान में MRI जांच पर मंडराया संकट ,हीलियम की कमी से ठप हो सकती हैं मशीनें रघु शर्मा ने सरकार को दी चेतावनी

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा (Raghu Sharma) ने राज्य में हीलियम गैस (Helium Gas) की भारी किल्लत को लेकर भजनलाल सरकार को आगाह किया है। रघु शर्मा का दावा है कि यदि समय रहते हीलियम की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में लगी करोड़ों रुपये की MRI मशीनें कबाड़ में बदल सकती हैं और मरीजों को जांच के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।

MRI और हीलियम का क्या है कनेक्शन? क्यों है यह जरूरी?

एमआरआई (MRI) मशीन के संचालन में तरल हीलियम (Liquid Helium) एक अनिवार्य घटक है।

कूलिंग सिस्टम: एमआरआई मशीनों में सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट होते हैं, जिन्हें चालू रखने के लिए अत्यंत कम तापमान (लगभग -269°C) की आवश्यकता होती है। यह तापमान केवल तरल हीलियम के जरिए ही बनाए रखा जा सकता है।

मशीन को खतरा: यदि हीलियम का स्तर एक निश्चित सीमा से नीचे गिर जाता है, तो मशीन 'क्वैंच' (Quench) हो सकती है। इसका मतलब है कि मैग्नेट गर्म हो जाएगा और मशीन पूरी तरह खराब हो सकती है, जिसे ठीक करने में करोड़ों का खर्च आता है।

रघु शर्मा का हमला: "गंभीरता दिखाए सरकार, वरना जनता भुगतेगी"

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने सोशल मीडिया और प्रेस के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं:

आपूर्ति में बाधा: रघु शर्मा ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ हफ्तों से हीलियम की सप्लाई चैन बाधित है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मौन है।

गरीबों पर मार: उन्होंने कहा, "निजी अस्पतालों में एमआरआई जांच 5,000 से 10,000 रुपये में होती है। सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा मुफ्त या सस्ती है। यदि मशीनें बंद हुईं, तो गरीब मरीज कहां जाएगा?"

चेतावनी: उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि 48 घंटों के भीतर बैकअप प्लान तैयार नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

क्या है हीलियम किल्लत की वजह?

भारत अपनी हीलियम की अधिकांश जरूरत के लिए आयात (विशेषकर अमेरिका और कतर) पर निर्भर है।

वैश्विक संकट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हीलियम के उत्पादन और सप्लाई में आई कमी का असर अब राजस्थान के अस्पतालों तक पहुंच रहा है।

लॉजिस्टिक्स की समस्या: तरल हीलियम को विशेष क्रायोजेनिक कंटेनरों में लाना होता है, जिसकी लागत और उपलब्धता वर्तमान में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अस्पतालों की स्थिति: जयपुर से लेकर जोधपुर तक अलर्ट

जयपुर के एसएमएस (SMS) अस्पताल और जोधपुर के एमडीएम (MDM) अस्पताल समेत कई बड़े केंद्रों में हीलियम का स्टॉक 'क्रिटिकल' लेवल पर पहुंच गया है। अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सरकार को पत्र लिखा है।

राजस्थान स्वास्थ्य विभाग का पक्ष

हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने हीलियम आपूर्ति करने वाली कंपनियों के साथ आपातकालीन बैठक बुलाई है। विभाग अन्य राज्यों से हीलियम के कुछ सिलेंडर 'उधार' लेने पर भी विचार कर रहा है।