पुरानी गाड़ी अब गले की हड्डी नहीं, बनेगी फायदे का सौदा ,बिहार की नई स्क्रेप पॉलिसी की 5 बड़ी बातें
News India Live, Digital Desk: आज (8 जनवरी 2026) बिहार के मध्यम वर्ग और ट्रांसपोर्टरों के लिए एक बड़ी खबर आई है। अगर आपके घर के आंगन या गैरेज में कोई ऐसी कार, ट्रक या मोटरसाइकिल खड़ी है जिसकी उम्र 15 साल से ज्यादा हो गई है, तो आपके लिए खुश होने का मौका है। बिहार सरकार ने अपनी नई 'स्क्रेप पॉलिसी' को हरी झंडी दे दी है।
आखिर इस पॉलिसी की ज़रूरत क्यों पड़ी?
यकीन मानिए, हम सबको अपनी पहली गाड़ी से बहुत लगाव होता है। लेकिन विज्ञान और पर्यावरण के नजरिए से देखें तो 15 साल पुरानी गाड़ियां इंजन के मामले में 'दम' तोड़ देती हैं। ये सड़कों पर हादसे और हवा में ज़हर (प्रदूषण) बढ़ाने का काम करती हैं। अभी तक लोग पुरानी गाड़ियों को कम दाम में बेच देते थे या वे कबाड़खानों में गल रही थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
क्या मिलेगा आपको फायदा?
सरकार ने इस बार काफी 'राहत' भरी बातें कही हैं।
- टैक्स में छूट: अगर आप अपनी पुरानी गाड़ी को अधिकृत स्क्रेपिंग सेंटर पर ले जाकर 'कबाड़' (Scrap) करते हैं, तो आपको एक सर्टिफिकेट मिलेगा। इस सर्टिफिकेट को दिखाकर जब आप नई गाड़ी खरीदेंगे, तो आपको रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में भारी छूट मिलेगी।
- स्क्रेप वैल्यू: आपकी गाड़ी का जितना लोहा, रबर और पार्ट निकलेगा, उसका भी बाजार भाव से आपको नकद भुगतान किया जाएगा।
- चालान से मुक्ति: फिटनेस टेस्ट की जटिलता और सड़कों पर पकड़े जाने के डर से आपको हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
नई गाड़ियों का रास्ता होगा साफ
बिहार में इस नीति का मकसद सड़कों को सुरक्षित और साफ़ बनाना है। सरकार चाहती है कि सड़कों पर नए और ईको-फ्रेंडली (जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल) वाहनों की संख्या बढ़े। अगर आपकी गाड़ी कमर्शियल है, तो इस पॉलिसी से मिलने वाली राहत और भी ज्यादा हो सकती है, जिससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को नयी गति मिलेगी।
हमारी सलाह:
भावनाओं में बहकर पुरानी खटारा गाड़ी चलाने से अच्छा है कि उसे सम्मान के साथ 'रिटायर' किया जाए और सरकारी छूट का फायदा उठाकर आधुनिक और सुरक्षित वाहन लाया जाए। याद रखिये, ये बदलाव न केवल आपके पैसे बचाएगा, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए हवा को भी साफ़ रखेगा।
जल्द ही सरकार इन सेंटर्स की लिस्ट जारी करेगी जहाँ आप अपनी गाड़ी ले जा सकेंगे। तब तक अपनी गाड़ी के पुराने कागज दुरुस्त कर लें ताकि फायदे लेने में देरी न हो।