हिजाब विवाद के पीछे छूटा, नुसरत परवीन ने बिहार में शुरू किया तालीम का नया सफर

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News India Live, Digital Desk : सरकारी नौकरी की चाहत में इंसान रात-दिन एक कर देता है, और जब सफलता मिल जाए, तो वह पल सबसे खास होता है। लेकिन बिहार की रहने वाली नुसरत परवीन के लिए यह सफर इतना सीधा नहीं था। नुसरत का नाम पिछले कुछ समय से चर्चा में है वजह है उनके पहनावे (हिजाब) को लेकर उठा एक विवाद।

बीपीएससी (BPSC) शिक्षक बहाली की प्रक्रिया पूरी कर चुकीं नुसरत अब अंततः स्कूल ज्वाइन कर चुकी हैं। आज (8 जनवरी 2026) की तारीख उनके और उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो समाज के बंधनों और प्रशासनिक जटिलताओं के बीच अपनी राह बनाती हैं।

विवाद क्या था और क्यों चर्चा में आईं नुसरत?
आपको याद होगा कि कुछ समय पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक सभा के दौरान नुसरत और हिजाब के मुद्दे ने काफी तूल पकड़ा था। कुछ तकनीकी कारणों या स्थानीय अधिकारियों के रुख की वजह से उनकी ज्वॉइनिंग और हिजाब को लेकर सवाल खड़े किए गए थे। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस पर खूब बहस हुई—कुछ लोग परंपरा की दुहाई दे रहे थे, तो कुछ नियमों की। लेकिन इन सब शोर-शराबे के बीच नुसरत शांत रहीं और अपनी शर्तों पर आगे बढ़ने का फैसला किया।

शुरू हुई नई पारी
आज खबर ये है कि नुसरत परवीन ने अपनी नई ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। अब वह बिहार के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को शिक्षा देंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने शिक्षा के अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। नुसरत के स्कूल पहुँचने पर सहकर्मियों और छात्रों ने भी उनका स्वागत किया है। यह कहानी हमें बताती है कि जब नीयत साफ़ हो और आपके हाथ में योग्यता की डिग्री हो, तो कोई भी रुकावट आपकी प्रगति को रोक नहीं सकती।

शिक्षक और समाज का रिश्ता
एक टीचर का काम होता है बच्चों के मन से अंधेरे को मिटाना। नुसरत की इस शुरुआत से समाज को एक बड़ा संदेश गया है। धर्म और पहनावा अपनी जगह है, लेकिन एक शिक्षक की पहचान उसकी पढ़ाई और उसकी मेहनत से होती है। बिहार जैसे राज्य में जहाँ शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार हो रहे हैं, वहाँ नुसरत जैसे जागरूक और दृढ़ निश्चय वाले टीचर्स की वाकई ज़रूरत है।

हमारी राय:
अंततः जीत उन बच्चों की हुई जिन्हें अब एक नई और ऊर्जावान टीचर मिलने वाली है। विवादों को पीछे छोड़कर नौकरी शुरू करना दिखाता है कि नुसरत सिर्फ नाम कमाने के लिए नहीं, बल्कि अपना काम ईमानदारी से करने के लिए यहाँ आई हैं। बिहार सरकार और विभाग ने भी यहाँ सूझबूझ दिखाई है, जिससे मामला अब शांति से सुलझता नजर आ रहा है।

नुसरत को उनके नए सफर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ। उम्मीद है कि उनके हाथ में कलम थामते ही वो पुराने कड़वे अनुभव धीरे-धीरे फीके पड़ जाएंगे।