ब्लिंकिट की 10 मिनट वाली डिलीवरी से सरकार खुश नहीं, अब आपको करना पड़ सकता है इंतज़ार
News India Live, Digital Desk : पिछले कुछ सालों में ब्लिंकिट (Blinkit) और ज़ोमैटो जैसी कंपनियों ने हमें एक ऐसी सुविधा की आदत डाल दी है कि हम सामान मंगवाते वक्त घड़ी की सुइयों को देखने लगते हैं। 10 मिनट में सामान घर पहुँचने का वादा सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन इस रफ़्तार के पीछे जो प्रेशर है, वह अब चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में खबर आई है कि सरकार ने इस 10 मिनट वाली डिलीवरी सर्विस को लेकर काफी सख्त निर्देश दिए हैं।
आखिर सरकार क्यों है नाराज़?
दरअसल, सरकार और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि '10 मिनट डिलीवरी' का यह वादा सड़क पर चलने वाले लोगों और खुद डिलीवरी पार्टनर (Delivery Partner) के लिए जोखिम भरा है। रफ़्तार के इस चक्कर में डिलीवरी बॉय ट्रैफिक नियमों को तोड़ने और ज़िदगी जोखिम में डालने पर मजबूर हो जाते हैं। सरकार का कहना है कि सामान समय पर पहुँचना ज़रूरी है, लेकिन किसी की जान की कीमत पर नहीं।
ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि उनकी पूरी ब्रैंडिंग इसी तेज़ी पर टिकी है। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि कई जगहों पर हादसों की संख्या बढ़ी है और डिलीवरी राइडर्स पर बढ़ते मानसिक तनाव ने अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे डिलीवरी का ऐसा समय तय न करें जिससे उनके कर्मचारी अपनी सुरक्षा के साथ समझौता करें।
क्या अब सर्विस पूरी तरह बंद हो जाएगी?
इसका मतलब यह नहीं है कि आपको घर बैठे सामान नहीं मिलेगा। दरअसल, सरकार चाहती है कि कंपनियां 'शॉर्ट-कट' के बजाय सुरक्षा (Safety First) को प्राथमिकता दें। संभव है कि आने वाले समय में हमें 10 मिनट की जगह 15 या 20 मिनट की टाइमिंग दिखाई दे, जिससे राइडर्स को सड़क पर भागमभाग न करनी पड़े।
यह खबर उन लाखों लोगों के लिए एक सीख की तरह है जो डिलीवरी में दो मिनट की देरी होने पर कस्टमर केयर को फोन करने लगते हैं। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि जो व्यक्ति हमारा सामान लेकर आ रहा है, वह भी एक इंसान है और उसकी सुरक्षा भी उतनी ही कीमती है जितना हमारा मंगाया हुआ सामान।
अब गेंद कंपनियों के पाले में है। उन्हें अपना बिजनेस मॉडल ऐसा बनाना होगा जो मुनाफे के साथ-साथ मानवता और सुरक्षा का भी ख्याल रखे। फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि ब्लिंकिट की वह 'बुलेट वाली रफ़्तार' अब कुछ कम होने वाली है।