देशभक्ति और सम्मान का नया नियम, क्या राष्ट्रगान जैसा ही प्रोटोकॉल मिलेगा राष्ट्रगीत वंदे मातरम को?
News India Live, Digital Desk : हम में से शायद ही कोई ऐसा होगा जिसके रोंगटे 'वंदे मातरम' सुनकर खड़े न होते हों। बचपन से स्कूल की असेंबली हो या किसी सरकारी आयोजन का समापन, इस गीत ने हमेशा हमें गौरव की अनुभूति कराई है। लेकिन अब तक 'जन गण मन' (राष्ट्रगान) और 'वंदे मातरम' (राष्ट्रगीत) के प्रोटोकॉल यानी सम्मान देने के तरीके में एक बारीक सा अंतर रहा है।
अक्सर आपने देखा होगा कि राष्ट्रगान बजते ही हम सब सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाते हैं, लेकिन राष्ट्रगीत के समय हर बार ऐसा नियम लागू नहीं था। अब खबर आ रही है कि सरकार इस सोच को बदलने की दिशा में बढ़ रही है।
बराबरी का सम्मान देने की तैयारी
सरकार की ओर से इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है कि 'वंदे मातरम' को भी वही स्थान और सम्मान दिया जाए, जो राष्ट्रगान को मिलता है। इसका मतलब है कि भविष्य में जब भी 'वंदे मातरम' बजाया या गाया जाएगा, तो लोगों को उसके सम्मान में खड़ा होना होगा।
इसका उद्देश्य बेहद साफ है—राष्ट्रगीत हमारे स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रहा है। आजादी की लड़ाई के दौरान इस एक नारे ने लाखों भारतीयों में जोश भरा था। ऐसे में इसे राष्ट्रगान के बराबर प्रोटोकॉल देना हमारे गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने जैसा है।
लोगों की राय और आने वाला बदलाव
सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक अब इसकी चर्चा शुरू हो गई है। लोग मानते हैं कि अगर हम अपनी पहचान और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों का सम्मान करेंगे, तभी नई पीढ़ी भी उनसे जुड़ेगी। हालांकि, नियम कब से लागू होंगे और इनके स्वरूप पर सरकार की स्थिति और साफ होना बाकी है, लेकिन संकेत साफ हैं—आने वाले दिनों में हमें देश के प्रति अपना सम्मान जताने का एक और सुनहरा अवसर मिलने वाला है।
अंत में, चाहे नियम कोई भी हो, राष्ट्रभक्ति मन से आती है। पर जब इस भक्ति को एक औपचारिक नियम मिल जाता है, तो देश की एकता और मजबूत नजर आती है।