New Travel Trends : घूमने का मतलब बदल रहा है,अब होटल और सेल्फी नहीं, एक्सपीरियंस खोज रहे हैं भारतीय टूरिस्ट

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News India Live, Digital Desk: छुट्टी का नाम सुनते ही आपके दिमाग में क्या आता है? शायद किसी शानदार होटल में आराम करना, अच्छे-अच्छे रेस्टोरेंट में खाना खाना, मशहूर जगहों पर जाकर ढेर सारी तस्वीरें खिंचवाना और फिर वापस घर आ जाना. सालों से हमारे लिए छुट्टी का मतलब यही हुआ करता था. लेकिन अब, खासकर कोरोना के बाद, भारतीय टूरिस्टों के लिए घूमने की परिभाषा तेजी से बदल रही है.

अब छुट्टियां सिर्फ आराम करने या जगहों को 'देखने' तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें 'जीने' का नाम है. इस नए ट्रेंड को "एक्सपीरियंस-फर्स्ट ट्रैवल" यानी 'अनुभव को प्राथमिकता' देना कहा जा रहा है.

क्या है यह "एक्सपीरियंस-फर्स्ट" का फंडा?

सीधे शब्दों में कहें तो अब यात्री किसी जगह की खूबसूरती देखने के साथ-साथ वहां की संस्कृति, खान-पान और लोकल ज़िंदगी का हिस्सा बनना चाहते हैं. वे अब टूरिस्ट बनकर नहीं, बल्कि एक ट्रैवलर की तरह घूमना पसंद कर रहे हैं. उनका मकसद सिर्फ उस जगह पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना नहीं, बल्कि वहां से कुछ नया सीखकर और कुछ यादगार अनुभव लेकर लौटना है.

क्यों बदल रही है भारतीयों की सोच?

इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं:

  • जिंदगी छोटी है: कोरोना काल ने हम सबको सिखाया कि जिंदगी का कोई भरोसा नहीं. इसलिए लोग अब चीजों को टालने की बजाय उन्हें तुरंत अनुभव करना चाहते हैं.
  • सोशल मीडिया का असर: इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अब सिर्फ खूबसूरत जगहों की तस्वीरें नहीं, बल्कि वहां के अनोखे अनुभव, जैसे किसी गांव में रुकना, लोकल खाना बनाना सीखना या किसी एडवेंचर एक्टिविटी के वीडियो ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं. इससे लोग प्रेरित हो रहे हैं.
  • बोरियत से दूरी: एक जैसे होटल, एक जैसा खाना और वही भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाकर लोग बोर हो चुके हैं. अब उन्हें कुछ नया और रोमांचक चाहिए.

कैसा होता है एक्सपीरियंस-फर्स्ट ट्रैवल?

यह पारंपरिक छुट्टियों से बहुत अलग है. इसमें लोग:

  • होमस्टे को चुन रहे हैं: बड़े और महंगे होटलों की जगह अब लोग लोकल परिवारों के साथ उनके घरों (होमस्टे) में रुकना पसंद कर रहे हैं. इससे उन्हें वहां के कल्चर को करीब से जानने का मौका मिलता है.
  • लोकल खाना खा रहे हैं: फैंसी रेस्टोरेंट की बजाय, वे लोकल ढाबों या स्ट्रीट फूड को एक्सप्लोर कर रहे हैं, ताकि उस जगह का असली स्वाद चख सकें.
  • कुछ नया सीख रहे हैं: कई यात्री अब अपनी छुट्टियों में कुकिंग क्लास, पॉटरी मेकिंग, योगा रिट्रीट या किसी स्थानीय कला को सीखने में समय बिता रहे हैं.
  • प्रकृति के करीब जा रहे हैं: भीड़-भाड़ वाले शहरों से दूर, लोग अब ट्रैकिंग, कैंपिंग, रिवर राफ्टिंग या किसी शांत गांव में कुछ दिन बिताकर प्रकृति के साथ जुड़ना पसंद कर रहे हैं.

अब भारतीय यात्री सिर्फ एक चेकलिस्ट लेकर नहीं घूम रहे कि कौन-कौन सी जगहें देखनी हैं. वे अब एक कहानी की तलाश में निकल रहे हैं - एक ऐसी कहानी जो वे घर वापस आकर सिर्फ तस्वीरों में नहीं, बल्कि अपनी बातों और यादों में सुना सकें. घूमने का यह नया तरीका न सिर्फ़ उन्हें एक गहरा संतोष देता है, बल्कि उन जगहों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मज़बूत करता है.