बीजेपी में नितिन नवीन युग की शुरुआत? युवाओं को मौका मिलते ही सीनियर नेताओं की क्यों बढ़ने लगी धड़कनें

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News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि राजनीति में जब भी कोई नई ऊर्जा आती है, तो पुराने खिलाड़ियों का सतर्क होना लाजिमी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में पिछले कुछ समय से जिस तरह से बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, उसी कड़ी में अब नितिन नवीन का नाम भी जुड़ गया है। जैसे ही उन्हें अध्यक्ष (या महत्वपूर्ण कमान) की जिम्मेदारी सौंपी गई, पार्टी के गलियारों में चर्चाओं का दौर गरम हो गया।

अब सवाल यह है कि आखिर एक नियुक्ति से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें क्यों आ गई हैं?

बदलाव की आहट और 'सीनियरिटी' का डर
दरअसल, बीजेपी पिछले कुछ समय से 'पीढ़ी परिवर्तन' (Generation Shift) की राह पर है। हाईकमान का झुकाव अब ऐसे युवा चेहरों की तरफ ज्यादा दिख रहा है जो ग्राउंड पर एक्टिव हैं और आने वाले चुनाव के लिए पार्टी को नई धार दे सकते हैं। नितिन नवीन का आना उन बड़े और दिग्गज नेताओं के लिए एक संकेत की तरह है, जो सालों से अपना रसूख बनाए बैठे थे। उन्हें डर है कि नए सिस्टम में क्या उन्हें वही अहमियत मिलेगी, जो अब तक मिलती आई है?

गुटबाजी और नया समीकरण
हर पार्टी में छोटे-बड़े गुट होते हैं। नितिन नवीन को कमान मिलना किसी एक खास गुट की मजबूती के तौर पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में जो नेता कल तक पार्टी के फैसलों में सबसे ऊपर रहते थे, अब उन्हें लग रहा है कि टिकट बंटवारे से लेकर संगठन के बड़े निर्णयों तक, उनकी पकड़ ढीली हो सकती है। यह सिर्फ एक पद की बात नहीं है, बल्कि भविष्य के टिकटों और कद की लड़ाई है।

क्या संतुलन बना पाएंगे नितिन नवीन?
नितिन नवीन के सामने राह उतनी आसान भी नहीं है। उन्हें एक तरफ युवा जोश को साथ लेकर चलना है, तो दूसरी तरफ उन वरिष्ठ नेताओं को भी संभालना है जिनके पास अनुभव का भंडार है। राजनीति में अनुभव और जोश जब टकराते हैं, तो तालमेल बैठाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

पार्टी के भीतर यह बेचैनी किसी विरोध का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाले बदलावों की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। अब देखना यह है कि इस नई जिम्मेदारी के बाद पार्टी आने वाले चुनाव में कितनी एकजुट नजर आती है।