ईरान में मोजतबा खामेनेई युग की शुरुआत पिता की मौत के बाद संभाली सत्ता, लेकिन कांटों भरा है सुप्रीम लीडर का ताज

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 News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान ने अपने नए 'रहनबर' (सुप्रीम लीडर) के नाम का ऐलान कर दिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को देश का तीसरा सर्वोच्च नेता चुना गया है। हालांकि, मोजतबा के लिए यह सफर आसान नहीं होने वाला है। एक तरफ बाहरी दुश्मन युद्ध के मैदान में डटे हैं, तो दूसरी तरफ घर के अंदर ही उनके खिलाफ असंतोष की लहर उठने लगी है।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई लंबे समय से पर्दे के पीछे से ईरान की सत्ता को प्रभावित करते रहे हैं। उन्हें 'अयातुल्ला' की पदवी दी गई है और वे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के बेहद करीबी माने जाते हैं। मोजतबा का चयन 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' द्वारा एक ऐसे समय में किया गया है जब ईरान अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है।

मोजतबा के सामने 3 सबसे बड़ी चुनौतियां

वंशानुगत शासन का विरोध: 1979 की इस्लामी क्रांति राजशाही (शाह का शासन) को खत्म करने के लिए हुई थी। अब खामेनेई के बेटे का ही सर्वोच्च पद पर बैठना कई कट्टरपंथियों और आम जनता को नागवार गुजर रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह 'इस्लामी गणतंत्र' को फिर से 'राजशाही' में बदलने जैसा है।

बाहरी युद्ध और ट्रंप की चेतावनी: अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का सीधा संघर्ष चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा को पहले ही "अस्वीकार्य" करार दिया है। बाहरी हमलों ने ईरान के सैन्य और आर्थिक ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है।

कमजोर होता 'वफादार' आधार: दशकों से जो कट्टरपंथी तबका शासन की ढाल बना रहा, अब उसमें दरारें दिखने लगी हैं। आर्थिक तबाही, महंगाई और सख्त पाबंदियों के कारण आम ईरानियों के साथ-साथ शासन के निचले स्तर के वफादार भी अब बदलाव की मांग कर रहे हैं।

ईरान का भविष्य: 'आयरन फिस्ट' या समझौता?

जानकारों का मानना है कि मोजतबा के पास अपनी सत्ता बचाने के लिए 'आयरन फिस्ट' (सख्ती) दिखाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। वे अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सुरक्षा बलों में बड़े बदलाव (Purge) कर सकते हैं और विरोधियों को कुचलने के लिए नई नीतियां ला सकते हैं।