World War 3 का डर? एक तरफ ईरान से भीषण जंग, दूसरी तरफ अमेरिका ने उत्तर कोरिया की दहलीज पर शुरू किया महाभ्यास
News India Live, Digital Desk: दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी नजर आ रही है। एक तरफ पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच विनाशकारी युद्ध जारी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर 'फ्रीडम शील्ड 2026' (Freedom Shield 2026) नामक एक विशाल सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। इस कदम ने न केवल उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की आहट को तेज कर दिया है।
ईरान संकट के बीच 'फ्रीडम शील्ड' का आगाज
आज यानी 9 मार्च 2026 से शुरू हुआ यह अभ्यास 19 मार्च तक चलेगा। चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका यह युद्धाभ्यास ऐसे समय में कर रहा है जब उसकी सेना का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए है। दक्षिण कोरियाई मीडिया में यह अटकलें भी तेज हैं कि अमेरिका ने अपनी रक्षा प्रणाली 'पैट्रियट' (Patriot Missile Systems) को दक्षिण कोरिया से हटाकर ईरान के खिलाफ युद्ध क्षेत्र में तैनात करना शुरू कर दिया है।
क्या है इस महाभ्यास का मकसद?
18,000 सैनिकों की हुंकार: इस अभ्यास में दक्षिण कोरिया के लगभग 18,000 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिकी सैनिकों की संख्या को सुरक्षा कारणों से गोपनीय रखा गया है।
मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस: यह केवल जमीन पर होने वाली ड्रिल नहीं है, बल्कि इसमें साइबर, स्पेस और समुद्र से होने वाले हमलों से निपटने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
परमाणु खतरे से निपटारा: अभ्यास का मुख्य केंद्र उत्तर कोरिया के परमाणु खतरों को नाकाम करना और किसी भी आपात स्थिति में दक्षिण कोरिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
किम जोंग उन की धमकी: "यह आक्रमण की तैयारी है"
उत्तर कोरिया ने हमेशा की तरह इस सैन्य अभ्यास को 'युद्ध का पूर्वाभ्यास' करार दिया है। प्योंगयांग से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन इस अभ्यास के विरोध में बड़े मिसाइल परीक्षण कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया, अमेरिका की ईरान में व्यस्तता का फायदा उठाकर कोई बड़ा दुस्साहस कर सकता है।
दुनिया पर क्या होगा असर?
दो मोर्चों पर तनाव बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गहरा संकट मंडरा रहा है। अगर एक तरफ ईरान के साथ युद्ध खिंचता है और दूसरी तरफ कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ता है, तो इससे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ना तय है।