ईरान में मौत की बारिश'? इजरायली हमले के बाद जहरीले धुएं से ढका आसमान बरस रही हैं तेल की काली बूंदें

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब प्रकृति के लिए भी काल बन गया है। ईरान की राजधानी तेहरान से रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। इजरायल द्वारा तेल डिपो और रिफाइनरियों पर किए गए ताबड़तोड़ हमलों के बाद तेहरान का आसमान पूरी तरह काला हो चुका है। हालत यह है कि दिन में भी रात जैसा अंधेरा छाया हुआ है और आसमान से पानी नहीं, बल्कि 'जहर' बरस रहा है।

'ब्लैक मॉन्स्टर' ने निगला आसमान: तेहरान में हाहाकार

स्थानीय निवासियों ने इस मंजर को 'कयामत' (Apocalyptic) जैसा बताया है। हमलों के कारण लगी भीषण आग से निकले हाइड्रोकार्बन, सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड ने हवा को जहरीला बना दिया है।

काली बारिश: रविवार को तेहरान में हुई बारिश ने लोगों को दहशत में डाल दिया। बादलों से गिरने वाली बूंदें तेल से सनी हुई थीं, जिससे सड़कें, गाड़ियां और घर काले पड़ गए।

सांस लेना हुआ दूभर: हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि लोगों को आंखों में जलन, गले में संक्रमण और सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है।

ईरानी रेड क्रिसेंट की चेतावनी: "घर से बाहर न निकलें"

ईरान की 'रेड क्रिसेंट सोसाइटी' ने आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि यह बारिश 'अत्यधिक खतरनाक और अम्लीय (Acidic)' हो सकती है।

त्वचा और फेफड़ों को खतरा: चेतावनी दी गई है कि इस काली बारिश के संपर्क में आने से त्वचा जल सकती है (Chemical Burns) और फेफड़ों को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है।

इनडोर रहने की सलाह: लोगों को सलाह दी गई है कि वे खिड़की-दरवाजे बंद रखें और बारिश के तुरंत बाद बाहर न निकलें।

एसी का इस्तेमाल न करें: जहरीले कणों को घर के अंदर आने से रोकने के लिए एयर कंडीशनर बंद रखने को कहा गया है।

इजरायल का दावा: "ये मिलिट्री टारगेट थे"

दूसरी ओर, इजरायली सेना (IDF) का कहना है कि उन्होंने केवल उन तेल डिपो को निशाना बनाया है जिनका इस्तेमाल ईरानी सेना अपनी सैन्य मशीनरी और बैलिस्टिक मिसाइलों के ईंधन के लिए कर रही थी। हालांकि, इन हमलों ने करोड़ों की आबादी वाले शहर को एक बड़े पर्यावरणीय संकट (Ecological Crisis) में धकेल दिया है।

दुनिया के लिए खतरे की घंटी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल ईरान की समस्या नहीं है। तेल डिपो से निकलने वाला यह जहरीला धुआं और कार्बन उत्सर्जन वैश्विक जलवायु (Global Climate) के लिए भी बेहद खतरनाक है। अगर यह जंग जल्द नहीं रुकी, तो पूरा क्षेत्र एक बड़े स्वास्थ्य संकट की चपेट में आ सकता है।