Migraine and Neck Stiffness connection: कहीं आपके सिरदर्द की जड़ आपकी गर्दन तो नहीं? जानें आयुर्वेद के अचूक उपाय और बचाव के तरीके
नई दिल्ली/लखनऊ। क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिनकी सुबह गर्दन के भारीपन और कंधों के खिंचाव के साथ होती है? अक्सर हम इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही जकड़न कुछ ही घंटों में एक भयावह माइग्रेन अटैक का रूप ले लेती है। चिकित्सा जगत और आयुर्वेद दोनों ही अब इस बात पर सहमत हैं कि माइग्रेन (Migraine) का सीधा संबंध हमारी गर्दन और कंधों की मांसपेशियों (Cervical Muscles) से है। अगर आपकी गर्दन 'जाम' है, तो सिरदर्द से पूरी तरह राहत पाना लगभग नामुमकिन है।
गर्दन और कंधों की जकड़न: माइग्रेन का 'साइलेंट' ट्रिगर
हमारी गर्दन एक पुल की तरह है जो शरीर और दिमाग को जोड़ती है। जब हम घंटों तक कंप्यूटर के सामने झुककर बैठते हैं या तनाव में रहते हैं, तो यहाँ की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं।
नसों पर दबाव: गर्दन की मांसपेशियों के सख्त होने से सिर की ओर जाने वाली रक्त धमनियां और नसें दबने लगती हैं।
ब्लड सर्कुलेशन में कमी: जब मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलता, तो वह दर्द के रूप में 'अलार्म' बजाता है, जिसे हम माइग्रेन कहते हैं।
पोस्चर की गलती: 'टेक्स्ट नेक' (लगातार फोन की ओर झुकना) आज माइग्रेन का सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
आयुर्वेद का नज़रिया: 'वात' का असंतुलन है असली जड़
आयुर्वेद के अनुसार, माइग्रेन और गर्दन की अकड़न का मुख्य कारण वात दोष (Vata Dosha) का बिगड़ना है। वात का स्वभाव सूखा और ठंडा होता है। जब शरीर में वात बढ़ता है, तो यह मांसपेशियों की लचक (Flexibility) को सोख लेता है, जिससे जकड़न पैदा होती है।
आयुर्वेदिक सूत्र: "तत्र वात: प्रधानम्" - अर्थात दर्द की किसी भी प्रक्रिया में वात की भूमिका सबसे प्रमुख है। जब यह वात गर्दन के क्षेत्र में रुकता है, तो यह 'मन्यास्तंभ' (गर्दन की जकड़न) और 'अर्धावभेदक' (माइग्रेन) को जन्म देता है।
माइग्रेन और जकड़न से राहत के लिए आयुर्वेदिक उपचार
अगर आप पेनकिलर्स खाकर थक चुके हैं, तो आयुर्वेद के ये प्राचीन उपचार स्थायी राहत दे सकते हैं:
अभ्यंग (तेल मालिश): महानारायण तेल या तिल के तेल को गुनगुना करके गर्दन और कंधों की मालिश करें। यह मांसपेशियों को पोषण देता है और वात को शांत करता है।
शिरोधारा: यह माइग्रेन के लिए रामबाण है। माथे पर तेल की निरंतर धार गिरने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और मानसिक तनाव खत्म होता है।
नस्य कर्म: नाक में अनु तेल या गाय के घी की दो बूंदें डालना माइग्रेन के हमलों की आवृत्ति (Frequency) को कम करने में बेहद कारगर है।
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दवाओं से ज्यादा आपकी आदतें मायने रखती हैं। माइग्रेन मुक्त जीवन के लिए इन सुझावों को अपनाएं:
20-20-20 का नियम: हर 20 मिनट के काम के बाद 20 सेकंड के लिए गर्दन को हल्का घुमाएं और दूर देखें।
सही तकिया: सोते समय बहुत ऊंचे या बहुत पतले तकिए का उपयोग न करें। गर्दन की प्राकृतिक गोलाई बनी रहनी चाहिए।
हाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी (Dehydration) मांसपेशियों की जकड़न और माइग्रेन दोनों को तुरंत ट्रिगर करती है।
तनाव प्रबंधन: गहरी सांस लेने का अभ्यास (प्राणायाम) करें। जब मन शांत होगा, तो गर्दन की मांसपेशियां अपने आप ढीली हो जाएंगी।
गर्म सिकाई: गर्दन और कंधों पर हीटिंग पैड से सिकाई करने से रक्त प्रवाह बढ़ता है और दर्द में तुरंत राहत मिलती है।