कूल्हों की जकड़न (Hip Stiffness) से हैं परेशान? इन 8 आसान योगासनों से पाएं गजब का लचीलापन और दर्द से राहत

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नई दिल्ली। आज की 'सिटिंग लाइफस्टाइल' यानी घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत ने हमारे शरीर को समय से पहले बूढ़ा बना दिया है। इसका सबसे बुरा असर हमारे कूल्हों (Hips) पर पड़ता है। जब कूल्हे अकड़ जाते हैं, तो इसका सीधा असर पीठ के निचले हिस्से (Lower Back) और घुटनों पर पड़ता है। आयुर्वेद और योग विज्ञान के अनुसार, कूल्हे हमारे शरीर का 'स्टोरेज हाउस' हैं जहाँ तनाव जमा होता है।

अगर आप भी सुबह उठते समय या कुर्सी से खड़े होते समय भारीपन महसूस करते हैं, तो ये 8 कोमल योगासन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। इन्हें आप घर पर बिना किसी विशेष उपकरण के आसानी से कर सकते हैं।

1. अपानासन (घुटने को छाती तक लाना)

यह आसन कूल्हों की अकड़न दूर करने का सबसे सरल तरीका है। पीठ के बल लेटकर अपने घुटनों को छाती की ओर लाएं और हाथों से पकड़ें। यह न केवल कूल्हों को खोलता है बल्कि पाचन में भी सुधार करता है।

2. बद्ध कोणासन (तितली मुद्रा)

सीधे बैठकर पैरों के तलवों को आपस में मिलाएं और घुटनों को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें। यह जांघों के भीतरी हिस्से (Inner Thighs) की जकड़न को खत्म करता है और रक्त संचार बढ़ाता है।

3. आनंदा बालासन (हैप्पी बेबी पोज़)

पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों से पैरों के बाहरी किनारों को पकड़ें। यह मुद्रा कूल्हों के जोड़ों को प्राकृतिक रूप से फैलाने में मदद करती है और मानसिक तनाव को भी कम करती है।

4. पश्चिमोत्तानासन (आगे झुकना)

बैठकर पैरों को सीधा फैलाएं और धीरे-धीरे आगे झुकते हुए पैरों के अंगूठों को छूने की कोशिश करें। यह हैमस्ट्रिंग और कूल्हों की मांसपेशियों को गहराई से स्ट्रेच करता है।

5. सुपाइन फिगर फोर पोज़

लेटकर एक पैर के टखने को दूसरे पैर के घुटने पर रखें और जांघ को अपनी ओर खींचें। यह 'साइटिका' के दर्द और कूल्हों के बाहरी हिस्से की सख्ती को दूर करने के लिए बेहतरीन है।

6. सपोर्टेड लो लंज (Anjaneyasana)

एक पैर आगे और दूसरा पीछे रखकर घुटने को जमीन पर टिकाएं। संतुलन के लिए दीवार या ब्लॉक का सहारा लें। यह 'हिप फ्लेक्सर्स' (Hip Flexors) को खोलने के लिए सबसे प्रभावी आसन माना जाता है।

7. सुप्त बद्ध कोणासन (लेटकर तितली मुद्रा)

तितली मुद्रा में रहते हुए धीरे से पीठ के बल लेट जाएं। यह गुरुत्वाकर्षण की मदद से कूल्हों को अपने आप खुलने देता है। गहरी नींद के लिए यह आसन रामबाण है।

8. बालासन (चौड़े घुटनों के साथ शिशु मुद्रा)

घुटनों को थोड़ा चौड़ा करके वज्रासन में बैठें और आगे झुककर माथा जमीन पर टिका दें। यह कूल्हों में जगह बनाता है और रीढ़ की हड्डी को आराम देता है।

अभ्यास के दौरान रखें ये सावधानियां

जल्दबाजी न करें: योग में 'खिंचाव' महसूस होना चाहिए, 'दर्द' नहीं। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही झुकें।

गहरी सांस लें: जब आप सांस छोड़ते हैं, तो मांसपेशियां अधिक रिलैक्स होती हैं, जिससे लचीलापन बढ़ता है।

नियमितता: सप्ताह में कम से कम 3-4 बार इन आसनों का अभ्यास करने से ही स्थायी लाभ मिलेगा।