Kisan Masterplan: संसद में जल्द आएंगे नए कृषि कानून शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलानअब नकली बीज और खाद बेचने वालों की खैर नहीं'
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 'किसान चौपाल' को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने किसानों के लिए एक अभूतपूर्व कानूनी कवच का वादा किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की मेहनत और उनकी फसल के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। जल्द ही संसद में बीज अधिनियम (Seed Act) 2026 और कीटनाशक अधिनियम (Pesticide Act) जैसे नए कानून पेश किए जाएंगे, जिनमें सजा और जुर्माने के बेहद कड़े प्रावधान होंगे।
नकली इनपुट्स के खिलाफ 'डिजिटल स्ट्राइक':
हर बीज पैकेट पर होगा QR कोड शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी कि नए कानूनों के तहत पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा।
QR कोड तकनीक: अब हर बीज के पैकेट पर एक विशिष्ट QR कोड होगा। इसे स्कैन करते ही किसान को पता चल जाएगा कि बीज कहाँ बना, किस डीलर ने सप्लाई किया और उसकी गुणवत्ता क्या है।
** traceability (खोजने की क्षमता):** यदि फसल खराब निकलती है, तो QR कोड के जरिए सीधे उस कंपनी या डीलर को पकड़ा जा सकेगा जिसने नकली माल बेचा था।
भारी जुर्माना और जेल:
₹30 लाख तक का दंड! पुराने कानूनों में सजा का प्रावधान काफी कम था, लेकिन नए मसौदे में इसे बेहद सख्त बनाया गया है:
जुर्माना: घटिया या नकली बीज बेचने पर अब ₹500 के बजाय ₹30 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
सजा: जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों को 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान प्रस्तावित है।
अनिवार्य पंजीकरण: बीज कंपनियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा और अनधिकृत विक्रेताओं पर पूरी तरह रोक लगेगी।
खेती को लाभ का धंधा बनाने की रणनीति:
'बागवानी और विविधीकरण' खेत की मेड़ पर बैठकर किसानों से संवाद करते हुए कृषि मंत्री ने फसल चक्र (Crop Cycle) बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा:सिर्फ धान नहीं: किसानों को केवल पारंपरिक खेती (जैसे धान) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि बागवानी और सब्जी उत्पादन को भी अपनाना चाहिए।
ड्रोन और आधुनिक तकनीक: डिजिटल कृषि मिशन के तहत ड्रोन तकनीक और सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation) को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि खेती की लागत कम हो और मुनाफा बढ़े।
किसानों के लिए जरूरी राहत:
परंपरागत बीजों पर कोई रोक नहीं मंत्री ने किसानों की एक बड़ी चिंता को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि नए कानून केवल व्यापारिक कंपनियों के लिए हैं।"किसान अपने परंपरागत बीजों को बचाने, इस्तेमाल करने और आपस में बदलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगे। स्थानीय बीज विनिमय की सदियों पुरानी व्यवस्था पर कोई पाबंदी नहीं लगेगी।" शिवराज सिंह चौहान