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April 04 2026 11:06 am

Mesh Sankranti 2026: 14 अप्रैल को मेष संक्रांति पर खत्म होगा 'खरमास', गूंजेंगी शहनाइयां और शुरू होंगे मांगलिक कार्य; जानें बैसाखी-विशु का शुभ मुहूर्त

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नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राजा सूर्य देव का राशि परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। 14 अप्रैल 2026 को सूर्य देव मीन राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर मंगल की राशि मेष में प्रवेश करेंगे। इस खास दिन को 'मेष संक्रांति' के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इसके साथ ही एक महीने से चला आ रहा 'खरमास' समाप्त हो जाएगा और देश भर में एक बार फिर मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।

शुभ कार्यों पर लगा 'ब्रेक' हटेगा, फिर शुरू होंगे विवाह और गृह प्रवेश

पिछले एक महीने से जब सूर्य देव देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में थे, तब 'खरमास' के कारण शादी-ब्याह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों पर रोक लगी हुई थी। ज्योतिष के अनुसार, बृहस्पति की राशि में सूर्य कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे मांगलिक कार्यों का फल नहीं मिलता। अब 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ ही सूर्य अपनी उच्च अवस्था की ओर बढ़ेंगे, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। खरमास खत्म होते ही देशभर में शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी और रुके हुए सभी शुभ काम फिर से शुरू हो सकेंगे।

देश के अलग-अलग राज्यों में 'न्यू ईयर' का जश्न

मेष संक्रांति का केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि बड़ा सामाजिक महत्व भी है। इसी दिन से सौर कैलेंडर के नए साल की शुरुआत होती है। यही कारण है कि भारत के विभिन्न राज्यों में इसे नए साल के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। 14 अप्रैल को पंजाब में 'बैसाखी' की रौनक होगी, तो ओडिशा में 'पाना संक्रांति' का पर्व मनाया जाएगा। इसके अगले दिन पश्चिम बंगाल में 'पोहेला वैशाख', केरल में 'विशु' और तमिलनाडु में 'पुथंडू' के रूप में नए साल का स्वागत किया जाएगा। यह दिन फसल कटाई और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

मेष संक्रांति 2026: पुण्य काल और महा पुण्य काल का सटीक समय

इस साल मेष संक्रांति सोमवार, 14 अप्रैल 2026 को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में पड़ रही है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। दान-पुण्य के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

पुण्य काल मुहूर्त: सुबह 06:09 बजे से दोपहर 01:03 बजे तक (कुल अवधि: 06 घंटे 54 मिनट)

महा पुण्य काल मुहूर्त: सुबह 06:09 बजे से सुबह 08:27 बजे तक (कुल अवधि: 02 घंटे 18 मिनट)

मान्यता है कि महा पुण्य काल में किया गया जप-तप और दान अक्षय फल प्रदान करता है और व्यक्ति को आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है।

अभिजीत मुहूर्त और शिववास योग का बन रहा है अद्भुत संयोग

ज्योतिषियों के अनुसार, साल 2026 की मेष संक्रांति कई मंगलकारी योगों के साथ आ रही है। इस दिन देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक 'शिववास योग' रहेगा, जो शिव साधना के लिए श्रेष्ठ है। इसके अलावा, दिन में 11 बजकर 24 मिनट से लेकर 12 बजकर 15 मिनट तक 'अभिजीत मुहूर्त' का भी संयोग बन रहा है। साथ ही कौलव और तैतिल करण की मौजूदगी इस दिन को और भी फलदायी बना रही है। इन शुभ योगों में सूर्य देव की उपासना करने से कार्यों में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के द्वार खुलते हैं।