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April 15 2026 12:36 am

सऊदी से दोस्ती पड़ी महंगी UAE ने पाकिस्तान से वापस मांगा 3.5 अरब डॉलर का कर्ज, बीच मंझधार में फंसी शहबाज सरकार

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News India Live, Digital Desk: आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक और बड़ा कूटनीतिक और वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को दिए गए 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 29,000 करोड़ रुपये) के कर्ज को तत्काल वापस चुकाने का फरमान सुना दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ बढ़ती सैन्य नजदीकियों ने यूएई को नाराज कर दिया है। पाकिस्तान ने अब भारी मन से इस महीने के अंत तक यह पूरी राशि लौटाने का निर्णय लिया है।

सऊदी अरब के साथ 'डिफेंस डील' बनी गले की हड्डी?

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यूएई की इस नाराजगी की मुख्य वजह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' (SMDA) है। सितंबर 2025 में हुई इस गुप्त डिफेंस डील के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब को सैन्य सुरक्षा देने का वादा किया है। क्षेत्रीय राजनीति में सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए, अबू धाबी ने पाकिस्तान के इस कदम को एक तरह का 'धोखा' माना है। यही कारण है कि जो कर्ज अब तक आसानी से 'रोल ओवर' (अवधि बढ़ाना) हो जाता था, उसे यूएई ने अब 17 अप्रैल तक हर हाल में वापस मांग लिया है।

स्टेट बैंक में जमा थी 'अमानत', अब खाली होगा खजाना

'जियो न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार, यह 3.5 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के पास एक 'सेफ डिपॉजिट' के रूप में रखी गई थी, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर दिखाने के लिए करता था। पाकिस्तान इस राशि पर 6 प्रतिशत का मोटा ब्याज भी चुका रहा था। दिसंबर 2025 से ही यूएई ने इस कर्ज की मियाद बढ़ाना बंद कर दिया था—पहले इसे एक महीने और फिर दो महीने के लिए टाला गया, लेकिन अब अंतिम डेडलाइन 17 अप्रैल तय कर दी गई है।

फंड्स की किल्लत या कूटनीतिक दबाव?

यूएई ने आधिकारिक तौर पर फंड वापसी का कारण मध्य पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध को बताया है, जिसमें उसे अपने संसाधनों की तत्काल जरूरत है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह पाकिस्तान को उसकी 'दोतरफा' नीति के लिए सबक सिखाने जैसा है। चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान को सऊदी अरब से 5 अरब डॉलर और चीन से 4 अरब डॉलर के रोलओवर की भी जरूरत है। अगर यूएई की देखा-देखी अन्य देशों ने भी हाथ खींच लिए, तो पाकिस्तान के लिए दिवालिया होने का खतरा फिर से पैदा हो सकता है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ेगा सीधा असर

वर्तमान में पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में लगभग 21 अरब डॉलर मौजूद हैं। तकनीकी रूप से पाकिस्तान इस कर्ज को चुकाने में सक्षम है, लेकिन 3.5 अरब डॉलर एक झटके में बाहर जाने से पाकिस्तानी रुपया फिर से गोता लगा सकता है। आने वाले महीनों में पाकिस्तान को अपनी अन्य उधारी चुकाने के लिए एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के सामने झोली फैलानी पड़ सकती है। सऊदी अरब की सैन्य मदद और ईरान संघर्ष में रियाद का पक्ष लेना अब पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बहुत भारी पड़ रहा है।