लोकसभा में बढ़ेंगी सीटें अब 543 नहीं बल्कि 850 सांसदों से गुलजार होगा सदन, महिला आरक्षण बिल से जुड़ा है ये कनेक्शन
News India Live, Digital Desk: भारतीय लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने वाली है। चर्चा है कि भविष्य में लोकसभा की सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर 850 तक पहुंच सकती है। इस बड़े बदलाव के पीछे का मुख्य आधार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) और देश में होने वाला आगामी परिसीमन (Delimitation) है। यदि ऐसा होता है, तो यह आजाद भारत के इतिहास में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा विस्तार होगा।
850 सीटों का गणित और परिसीमन का आधार
दरअसल, भारत में लोकसभा सीटों की संख्या लंबे समय से 1971 की जनगणना के आधार पर टिकी हुई है। संविधान के मुताबिक, साल 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सीटों का नए सिरे से निर्धारण यानी परिसीमन किया जाना है। बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रतिनिधित्व को संतुलित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 के करीब ले जानी होगी। नई संसद भवन की क्षमता को भी इसी भविष्यगामी सोच के साथ डिजाइन किया गया है, जहां लोकसभा हॉल में 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है।
महिला आरक्षण बिल और सीटों का पेच
महिला आरक्षण बिल के कानून बनने के बाद यह साफ हो गया है कि संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि, इस कानून को लागू करने के लिए दो मुख्य शर्तें जुड़ी हैं: पहली 'जनगणना' और दूसरी 'परिसीमन'। सरकार की मंशा है कि जब सीटों की कुल संख्या बढ़ेगी, तब मौजूदा पुरुष सांसदों की सीटों में कटौती किए बिना महिलाओं को उनका हक दिया जा सके। यानी 850 सीटों में से करीब 280 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
उत्तर बनाम दक्षिण भारत: प्रतिनिधित्व की चुनौती
सीटों की संख्या बढ़ने के साथ ही एक बड़ी राजनीतिक चुनौती भी सामने आ रही है। उत्तर भारत के राज्यों (जैसे यूपी, बिहार) में जनसंख्या वृद्धि दर दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) की तुलना में अधिक रही है। ऐसे में परिसीमन के बाद उत्तर भारतीय राज्यों की सीटें काफी बढ़ जाएंगी, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों को डर है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद संसद में उनका राजनीतिक दबदबा कम हो सकता है। सरकार को इस असंतुलन को दूर करने के लिए कोई ठोस फॉर्मूला निकालना होगा।
आम जनता और राजनीति पर क्या होगा असर?
लोकसभा की सीटें बढ़ने का सीधा मतलब है कि एक सांसद के पास विकास के लिए छोटा क्षेत्र होगा, जिससे जनता की समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से हो सकेगा। छोटे निर्वाचन क्षेत्र होने से सांसदों की पहुंच अपने मतदाताओं तक बढ़ेगी। साथ ही, राजनीति में महिलाओं की 33% भागीदारी से देश के नीति-निर्धारण में जेंडर बैलेंस (Gender Balance) आएगा और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्राथमिकता मिलेगी।