Lung Health After 35: 35 की उम्र के बाद होने लगी है सांस फूलने की समस्या? इन 6 योगासनों से खोलें अपनी छाती, फेफड़ों को मिलेगी 'सुपर पावर'

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हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको भी सीढ़ियां चढ़ते समय या सामान्य काम करते हुए जल्दी थकान महसूस होने लगी है? अक्सर 35 की उम्र पार करते ही डेस्क जॉब, शारीरिक सक्रियता की कमी और गलत पोस्चर के कारण हमारी छाती की मांसपेशियां सख्त होने लगती हैं। इससे पसलियां पूरी तरह फैल नहीं पातीं और फेफड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। डॉक्टरों के अनुसार, चेस्ट ओपनिंग योगासन (Chest Opening Yoga) न केवल शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ाते हैं, बल्कि ये तनाव कम करने और पॉस्चर को सुधारने में भी रामबाण साबित होते हैं।

35 के बाद क्यों जरूरी है चेस्ट ओपनिंग योग?

उम्र बढ़ने के साथ हमारे ऊतकों (Connective Tissues) का लचीलापन कम होने लगता है। घंटों लैपटॉप या मोबाइल के इस्तेमाल से कंधे आगे की ओर झुक जाते हैं, जिससे फेफड़ों पर दबाव पड़ता है। चेस्ट ओपनिंग योग इन प्रभावों को कम कर गहरी सांस लेने की आदत को दोबारा विकसित करते हैं, जिससे शरीर की कार्यक्षमता और एकाग्रता बढ़ती है।

फेफड़ों को मजबूत बनाने वाले 6 प्रमुख योगासन

1. ताड़ासन (Mountain Pose with Heart Lift)

यह आसन गहरी सांस लेने की नींव तैयार करता है।

कैसे करें: सीधे खड़े होकर अपनी छाती को थोड़ा ऊपर उठाएं और कंधों को पीछे की ओर ढीला छोड़ दें।

लाभ: यह फेफड़ों के ऊपरी हिस्से में हवा भरने की जगह बनाता है और गलत पॉस्चर को ठीक करता है।

2. भुजंगासन (Cobra Pose)

यह पसलियों के पिंजरे (Rib Cage) को फैलाने के लिए सबसे शक्तिशाली आसनों में से एक है।

कैसे करें: पेट के बल लेटें और हाथों के सहारे ऊपरी शरीर को धीरे-धीरे उठाएं। कोहनियों को हल्का मुड़ा हुआ रखें।

लाभ: यह छाती की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और ऑक्सीजन के अवशोषण (Absorption) की क्षमता बढ़ाता है।

3. सेतुबंधासन (Bridge Pose)

यह आसन छाती खोलने के साथ-साथ पीठ और कूल्हों को भी मजबूती देता है।

कैसे करें: पीठ के बल लेटकर घुटने मोड़ें और अपने कूल्हों को ऊपर उठाएं।

लाभ: यह ऊपरी शरीर में रक्त संचार को बढ़ाता है और ऑक्सीजन डिलीवरी को बेहतर बनाता है।

4. बैठकर छाती का विस्तार (Seated Chest Expansion)

यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो दिन भर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं।

कैसे करें: सीधे बैठकर अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाएं और उंगलियों को आपस में फंसाकर कंधों को पीछे खींचें।

लाभ: यह ऑफिस में काम के दौरान भी किया जा सकता है और तुरंत ताजगी का अनुभव कराता है।

5. उत्तान शिशोसासन (Puppy Pose)

यह कंधों और रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से को गहराई से रिलैक्स करता है।

कैसे करें: घुटनों के बल बैठकर हाथों को आगे फैलाएं और छाती को ज़मीन की ओर ले जाएं।

लाभ: यह उन क्षेत्रों को खोलता है जहाँ तनाव के कारण सांस लेने में रुकावट महसूस होती है।

6. सहारा लेकर मत्स्यासन (Supported Fish Pose)

35 की उम्र के बाद यह सबसे आरामदायक और प्रभावी चेस्ट ओपनर है।

कैसे करें: ऊपरी पीठ के नीचे एक कुशन या मुड़ा हुआ कंबल रखें और उस पर लेट जाएं।

लाभ: यह बिना किसी तनाव के छाती को निष्क्रिय (Passively) रूप से खोलता है और गहरी नींद लाने में भी सहायक है।

[Image showing Supported Fish Pose with a yoga bolster or cushion under the upper back]

अभ्यास के दौरान सुरक्षा के 5 मूल मंत्र

वॉर्म-अप: सीधा कठिन आसन शुरू करने से पहले शरीर को थोड़ा गतिशील करें।

धीमी गति: किसी भी अंग के साथ जोर-जबरदस्ती न करें।

सपोर्ट लें: गर्दन या पीठ में दर्द हो तो कुशन या ब्लॉक का इस्तेमाल जरूर करें।

साँसों पर ध्यान: आसन की गहराई से ज्यादा जरूरी है कि आप गहरी और लयबद्ध सांस लेते रहें।

नियमितता: सप्ताह में कम से कम 4-5 दिन अभ्यास करें।

फेफड़ों की सेहत में सुधार एक दिन में नहीं आता, लेकिन निरंतर अभ्यास से आप अपनी ऊर्जा और श्वास लेने की क्षमता में स्पष्ट बदलाव महसूस करेंगे।