MP-MLA कोर्ट के चक्कर काट रहे यूपी के दिग्गज नेता, महामारी के दौरान दर्ज हुए केसों ने बढ़ाई मुसीबत

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन उल्लंघन और अन्य नियमों के तहत दर्ज हुए मुकदमों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने आम नागरिकों पर दर्ज मुकदमों को तो वापस ले लिया है या बंद कर दिया है, लेकिन प्रदेश के सैकड़ों जन प्रतिनिधि (MP/MLA) अब भी इन मुकदमों के फेर में अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। अब राजनीतिक हलकों में इन 'माननीयों' के खिलाफ दर्ज मुकदमों को भी वापस लेने की मांग तेज हो गई है।

जनता 'फ्री', नेता अब भी 'कैदी'!

महामारी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने या धरना-प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए मुकदमों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

विषम स्थिति: जहाँ पुलिस और प्रशासन ने 'लोकहित' में आम जनता को बड़ी राहत दी, वहीं राजनेताओं के मामले अब भी 'स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट' में लंबित हैं।

राजनीतिक मांग: विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई नेताओं का तर्क है कि ये मुकदमे किसी आपराधिक प्रवृत्ति के कारण नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा या प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए थे, इसलिए इन्हें भी वापस लिया जाना चाहिए।

कानूनी पेच और स्पेशल कोर्ट की कार्यवाही

नेताओं के लिए मुश्किलें इसलिए भी बढ़ी हुई हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सांसदों और विधायकों के मुकदमों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है।

लंबी प्रक्रिया: केस वापसी की प्रक्रिया में गृह विभाग और कानूनी विशेषज्ञों की राय अनिवार्य है।

चुनावों पर असर: कई नेताओं को डर है कि इन लंबित मुकदमों के कारण भविष्य में उनके चुनाव लड़ने या नामांकन प्रक्रिया में तकनीकी बाधाएं आ सकती हैं।

क्या है सरकार का रुख?

हालांकि सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मुकदमों की समीक्षा जारी है। सूत्र बताते हैं कि केवल उन्हीं मुकदमों की वापसी पर विचार किया जा सकता है जो 'गंभीर प्रकृति' के नहीं हैं।