LPG Booking Rules : रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग पर सरकार का बड़ा फैसला, अब 15 नहीं 35 दिन बाद ही मिलेगी दूसरी रिफिल
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध (Iran-Israel War) के बीच भारत सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बुकिंग नियमों में एक और बड़ा बदलाव कर दिया है। लगातार बढ़ती 'पैनिक बुकिंग' और जमाखोरी को रोकने के लिए अब घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 kg) की दो बुकिंग के बीच का अनिवार्य अंतराल (Interlocking Period) बढ़ा दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, अब सामान्य उपभोक्ताओं को अगली रिफिल के लिए कम से कम 25 से 35 दिनों का इंतजार करना होगा, जबकि उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए यह समय सीमा और भी ज्यादा तय की गई है।
पैनिक बुकिंग रोकने के लिए सरकार ने उठाया सख्त कदम
सरकार ने यह कदम उन खबरों के बाद उठाया है जिनमें दावा किया गया था कि युद्ध के चलते गैस की किल्लत होने के डर से लोग जरूरत से पहले ही सिलेंडर बुक कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, कई लोग जो पहले 50-60 दिनों में सिलेंडर बुक करते थे, वे अब 15 दिनों में ही बुकिंग करने लगे थे। इसी कृत्रिम मांग को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने 'अनिवार्य गैप' को बढ़ा दिया है। अब यदि आप तय समय सीमा से पहले बुकिंग की कोशिश करेंगे, तो सिस्टम उसे 'Early Booking' बताकर ब्लॉक कर देगा।
किसे कितना करना होगा इंतजार? नए नियम एक नजर में
गैस कंपनियों ने ग्राहकों की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग समय सीमा तय की है:
शहरी उपभोक्ता (Urban Area): शहर में रहने वाले ग्राहकों के लिए बुकिंग अंतराल अब कम से कम 25 दिन होगा।
ग्रामीण उपभोक्ता (Rural Area): गाँवों में यह अंतराल बढ़ाकर 45 दिन तक कर दिया गया है।
उज्ज्वला योजना (PMUY): प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब अगली रिफिल के लिए 45 दिनों का इंतजार करना होगा।
डबल सिलेंडर (DBC) कनेक्शन: जिनके पास दो सिलेंडर वाले कनेक्शन हैं, उनके लिए यह अंतराल 35 दिन तय किया गया है।
मिडिल ईस्ट संकट और 'आवश्यक वस्तु अधिनियम'
भारत अपनी जरूरत का करीब 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' के रास्ते आता है। ईरान युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते पर पैदा हुए जोखिम को देखते हुए सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) की धाराओं को लागू कर दिया है। इसका उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता देना और कमर्शियल उपयोग में होने वाली गैस की चोरी को रोकना है। सरकार ने साफ किया है कि देश में गैस का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन वितरण व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए ये कड़े नियम जरूरी हैं