Heritage Sites in UP : यूपी की ऐतिहासिक विरासतों की बदहाली पर भड़का इलाहाबाद हाईकोर्ट, योगी सरकार को नोटिस
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासतों और स्मारकों की जर्जर होती हालत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रदेश में प्राचीन धरोहरों के उचित रख-रखाव और संरक्षण के अभाव को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने योगी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए अब तक सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं और बजट का आवंटन किस प्रकार किया गया है।
अदालत की तल्ख टिप्पणी: "विरासतें हमारा गौरव हैं, इन्हें मिटने नहीं दे सकते" न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों से समृद्ध है, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण कई महत्वपूर्ण स्थल खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। कोर्ट ने चिंता व्यक्त की कि यदि समय रहते इन स्मारकों की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए ये केवल किताबों के पन्नों तक सीमित रह जाएंगे। याचिका में विशेष रूप से कुछ प्रमुख जिलों के ऐतिहासिक किलों और प्राचीन मंदिरों की दयनीय स्थिति का जिक्र किया गया था।
योगी सरकार से मांगा गया पूरा ब्योरा हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी इस मामले में जवाबदेह ठहराया है। अदालत ने सरकार से अगले चार हफ्तों के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें सरकार को यह बताना होगा कि पिछले तीन वर्षों में धरोहरों के संरक्षण के लिए कितना फंड जारी किया गया और किन-किन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। साथ ही, उन अधिकारियों के खिलाफ भी जानकारी मांगी गई है जिनकी लापरवाही से ये स्थल असुरक्षित हुए हैं।
धरोहरों पर अतिक्रमण और गंदगी भी बनी बड़ी चुनौती सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि कई ऐतिहासिक स्थलों के आसपास अवैध कब्जे (Encroachment) हो गए हैं और वहां साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। असामाजिक तत्वों द्वारा स्मारकों की दीवारों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, धरातल पर बदलाव दिखना चाहिए। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे इन स्थलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करें।
क्या होगा अगली सुनवाई में? प्रदेश सरकार के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि सरकार पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ सरकार को अपनी कार्ययोजना का खाका पेश करना होगा। कानून के जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट की इस सक्रियता के बाद प्रदेश की कई उपेक्षित धरोहरों के दिन फिर सकते हैं।