BREAKING:
March 26 2026 10:52 pm

Jhansi Bribery case : CBI का बड़ा एक्शन सुपरिटेंडेंट प्रभा भंडारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज

Post

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के झांसी में केंद्रीय माल एवं सेवा कर (CGST) विभाग में तैनात सुपरिटेंडेंट प्रभा भंडारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रिश्वतखोरी के मामले में पहले से ही शिकंजे में फंसी प्रभा भंडारी के खिलाफ अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 'आय से अधिक संपत्ति' (DA Case) का एक नया और गंभीर मुकदमा दर्ज किया है। सीबीआई की इस कार्रवाई से झांसी से लेकर लखनऊ तक के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद खुला संपत्तियों का राज मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रभा भंडारी को एक व्यापारी से जीएसटी संबंधी काम के बदले मोटी रकम की मांग करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। उस समय हुई छापेमारी के दौरान सीबीआई की टीम को ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य मिले थे, जो उनकी वैध आय से कहीं ज्यादा संपत्तियों की ओर इशारा कर रहे थे। शुरुआती जांच के बाद सीबीआई ने पाया कि प्रभा भंडारी और उनके परिजनों के नाम पर करोड़ों की चल-अचल संपत्ति है, जिसका स्रोत उनकी आधिकारिक सैलरी से मेल नहीं खाता।

करोड़ों की बेनामी संपत्ति और निवेश का शक सीबीआई सूत्रों के अनुसार, प्रभा भंडारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से धन अर्जित किया और उसे रियल एस्टेट, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट और कीमती जेवर खरीदने में लगाया। जांच एजेंसी अब उन सभी बैंक खातों और लॉकरों की बारीकी से छानबीन कर रही है, जो उनके या उनके करीबियों के नाम पर हैं। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ अन्य बड़े नामों का भी खुलासा हो सकता है, जो इस 'भ्रष्टाचार के खेल' में उनके मददगार रहे थे।

लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत में FIR दर्ज सीबीआई की लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निवारण शाखा ने इस मामले में आईपीसी की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। बताया जा रहा है कि प्रभा भंडारी की संपत्तियों का मूल्य उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कई सौ प्रतिशत अधिक है। सीबीआई की टीम अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि यह पैसा केवल रिश्वत का है या इसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत केंद्रीय एजेंसियों ने पिछले कुछ समय में यूपी में कई बड़े अधिकारियों पर नकेल कसी है। प्रभा भंडारी पर हुआ यह ताजा एक्शन इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस मामले की रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को भी भेजी जा रही है, जिसके बाद उनके निलंबन या सेवा समाप्ति जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।