BREAKING:
March 26 2026 12:57 am

भारत और ब्रिटेन हैं दुनिया की नई AI महाशक्तियां, ऋषि सुनक ने की पीएम मोदी की तारीफ टेस्ट रैंकिंग का भी किया जिक्र

Post

News India Live, Digital Desk: पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) को दुनिया की उभरती हुई 'एआई महाशक्तियां' (AI Superpowers) करार दिया है। लंदन में भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बोलते हुए सुनक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दोनों देश दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने न केवल तकनीक और सुरक्षा पर चर्चा की, बल्कि भारत और इंग्लैंड के बीच क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का तड़का लगाते हुए आईसीसी टेस्ट रैंकिंग का भी मजाकिया अंदाज में जिक्र किया।

स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स में भारत का दबदबा

ऋषि सुनक ने वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित 'स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स' (Stanford AI Index) का हवाला देते हुए बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में एआई के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत अब इस रैंकिंग में ब्रिटेन से भी आगे निकल गया है। सुनक ने कहा, "भारत और यूके दोनों ही एआई के क्षेत्र में अग्रणी हैं। हालांकि भारत ने हमें पीछे छोड़ दिया है, लेकिन मैंने प्रधानमंत्री मोदी को मजाक में याद दिलाया कि आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में इंग्लैंड अभी भी भारत से आगे है।"

सुरक्षा और तकनीक: साझा विजन पर जोर

केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के मोर्चे पर भी सुनक ने भारत के साथ गहरे सहयोग की वकालत की। उन्होंने बताया कि जिस तरह दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करते हैं, उसी तरह उभरती हुई तकनीकों और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी 'इंटेलिजेंस शेयरिंग' को मजबूत करना होगा। सुनक ने भारत द्वारा पिछले साल स्थापित 'एआई सुरक्षा संस्थान' (AI Security Institute) की सराहना की और ब्रिटेन के साथ इसके तालमेल को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।

रेगुलेशन पर भारत-ब्रिटेन का एक जैसा नजरिया

एआई के नियमन (Regulation) को लेकर सुनक ने एक महत्वपूर्ण बिंदु रखा। उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन दोनों ही यूरोपीय संघ (EU) के 'ऊपर से थोपे गए' कड़े नियमों या अमेरिका के 'तदर्थ' (Ad-hoc) रवैये के पक्ष में नहीं हैं। इसके बजाय, दोनों देश एक व्यावहारिक और नवाचार-अनुकूल (Pro-innovation) दृष्टिकोण अपना रहे हैं। सुनक का मानना है कि यह साझा नजरिया दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जहाँ तकनीक को दबाने के बजाय उसके सुरक्षित इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है।