Khamenei Protest : भारत में प्रदर्शनों के पीछे पैसे का खेल मौलाना हसन अली रजनी ने अपनी ही कौम के लोगों को घेर

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News India Live, Digital Desk: ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद भारत के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों ने नई बहस छेड़ दी है। जहाँ एक तरफ इन प्रदर्शनों को धार्मिक भावना से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं शिया समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु मौलाना हसन अली रजनी ने एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने इन प्रदर्शनों के पीछे 'मनी एंगल' (Money Angle) होने की बात कहकर हलचल मचा दी है।

"जज्बात नहीं, फंडिंग है वजह" - मौलाना रजनी का आरोप

मौलाना हसन अली रजनी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बयान देते हुए सवाल उठाया है कि आखिर भारत के मुद्दों पर खामोश रहने वाले कुछ लोग विदेशों में हुई घटनाओं पर इतने उग्र क्यों हो जाते हैं?

पैसे का खेल: मौलाना ने आरोप लगाया कि भारत में होने वाले इन प्रदर्शनों के लिए खाड़ी देशों या विशेष संस्थाओं से 'फंडिंग' आती है।

किराए के प्रदर्शनकारी: उन्होंने यहाँ तक कहा कि कुछ लोगों को केवल भीड़ बढ़ाने और काले झंडे लहराने के लिए पैसे दिए जाते हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक खास नैरेटिव बनाया जा सके।

क्यों हो रहा है खामेनेई की हत्या का विरोध?

गौरतलब है कि हाल ही में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में ईरानी नेता अली खामेनेई की मौत की खबरें सामने आई थीं (जिसे हत्या बताया जा रहा है)। इसके बाद:

लखनऊ और कश्मीर में प्रदर्शन: भारत के लखनऊ, मुंबई और कश्मीर के कुछ हिस्सों में शिया समुदाय के एक वर्ग ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया और अमेरिका व इजराइल के खिलाफ नारेबाजी की।

धार्मिक जुड़ाव: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक (मार्जिया) थे।

मौलाना रजनी के बयान से शिया समुदाय में दो फाड़

मौलाना रजनी के इस बयान ने समुदाय के भीतर ही एक नई जंग छेड़ दी है।

एक पक्ष: मौलाना के बयान का समर्थन करते हुए कहता है कि भारतीय मुसलमानों को भारतीय मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और विदेशी एजेंडे से बचना चाहिए।

दूसरा पक्ष: प्रदर्शन करने वाले लोग मौलाना रजनी पर 'एजेंट' होने का आरोप लगा रहे हैं और उनके दावों को निराधार बता रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता

मौलाना रजनी द्वारा उठाए गए 'पैसे के एंगल' के बाद स्थानीय खुफिया विभाग और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या वाकई इन विरोध प्रदर्शनों को प्रायोजित (Sponsor) किया गया था और क्या इसके तार किसी विदेशी फंडिंग मॉड्यूल से जुड़े हैं।