World War 3 Alert : ईरान ने लिया अपने युद्धपोत का बदला अमेरिकी तेल टैंकर पर दागी मिसाइल जल उठा जहाज मची भीषण तबाही
News India Live, Digital Desk: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने अपने युद्धपोत के डूबने का बदला लेने के लिए फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया है।
इस हमले के बाद टैंकर धू-धू कर जल रहा है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
बदले की आग: 'IRIS डेना' के डूबने का प्रतिशोध
यह हमला तब हुआ जब बुधवार को एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS डेना (IRIS Dena) को टारपीडो से उड़ाकर डुबो दिया था।
ईरान की चेतावनी: ईरानी विदेश मंत्री ने कल ही चेतावनी दी थी कि अमेरिका को इस "समुद्री अत्याचार" के लिए भारी कीमत चुकानी होगी।
सटीक निशाना: IRGC ने आज सुबह उत्तरी फारस की खाड़ी में अमेरिकी लिंक वाले तेल टैंकर को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, जहाज पर मिसाइल लगते ही भीषण विस्फोट हुआ और उसमें आग लग गई।
होरमुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का 'पूर्ण नियंत्रण'
ईरानी सेना ने न केवल हमले का दावा किया, बल्कि यह भी घोषणा कर दी है कि अब होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर उनका पूरा नियंत्रण है।
ब्लॉकेज की चेतावनी: ईरान ने साफ कर दिया है कि अब यहाँ से केवल चीन और रूस के जहाजों को ही निकलने की अनुमति दी जाएगी।
अमेरिका और सहयोगियों पर बैन: अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगी देशों के किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने नहीं दिया जाएगा।
कुवैत के पास बड़ा धमाका; चालक दल की सुरक्षा पर सस्पेंस
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी कुवैत के तट से लगभग 30 समुद्री मील दूर एक बड़े विस्फोट की पुष्टि की है।
बहामास-ध्वज वाला जहाज: हालांकि ईरान इसे अमेरिकी टैंकर बता रहा है, लेकिन कुछ सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि प्रभावित जहाज 'सोनांगोल नामीबे' (Sonangol Namibe) हो सकता है, जो बहामास के झंडे के साथ चल रहा था।
तेल का रिसाव: धमाके के बाद जहाज से तेल का रिसाव शुरू हो गया है, जिससे पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा हो गया है।
दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल
इस हमले की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में आग लग सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।