Jan Suraaj vs Bihar Polls : चुनाव में कैश बांटने का आरोप जन सुराज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जस्टिस सूर्यकांत ने माँगा जवाब

Post

News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में अपनी नई पहचान बना रही जन सुराज पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता पर सवाल उठाते हुए देश की सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव के दौरान सत्ता पक्ष द्वारा वोट खरीदने के लिए बड़े पैमाने पर धन का वितरण किया गया है।

याचिका में लगाए गए मुख्य आरोप:

₹14,000 करोड़ का डायवर्जन: जन सुराज के नेताओं (पवन वर्मा और अन्य) ने आरोप लगाया है कि विश्व बैंक (World Bank) से विकास कार्यों के लिए मिली करीब ₹14,000 करोड़ की राशि को कथित तौर पर चुनावी खर्चों और मतदाताओं को लुभाने के लिए डायवर्ट किया गया।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: आरोप है कि इस योजना के नाम पर महिला मतदाताओं को ₹10,000 की नकद राशि बांटकर वोट प्रभावित करने की कोशिश की गई।

साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़: याचिका में कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन इन शिकायतों पर मौन है और चुनाव आयोग को इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

जस्टिस सूर्यकांत ने क्या कहा? (Court Observations)

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित टिप्पणियाँ कीं:

लोकतंत्र की शुचिता: कोर्ट ने कहा कि चुनाव में धन-बल का प्रयोग लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यदि सरकारी खजाने का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए किया जा रहा है, तो यह बेहद गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है।

चुनाव आयोग से जवाब: कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और बिहार सरकार को नोटिस जारी कर इस मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

हस्तक्षेप की सीमा: हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट चुनावी प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism) सही ढंग से काम कर रहा है या नहीं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

प्रशांत किशोर का पक्ष: पीके ने कहा कि "हम बिहार की व्यवस्था बदलने आए हैं। अगर चुनाव केवल पैसे के दम पर जीते जाएंगे, तो जनता का विश्वास लोकतंत्र से उठ जाएगा।"

सरकार का बचाव: सत्ताधारी दल ने इन आरोपों को "निराधार और हताशा भरा" बताया है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ देना कोई रिश्वत नहीं, बल्कि जनकल्याण है।