नेता प्रतिपक्ष को चुप कराना लोकतंत्र के लिए खतरा, राहुल गांधी के पक्ष में उतरे शशि थरूर

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News India Live, Digital Desk : संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर राहुल गांधी की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, जो कि संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

शशि थरूर के बयान के मुख्य बिंदु:

बोलने की आजादी पर पहरा: थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में 'विपक्ष के नेता' (LoP) का पद अत्यंत गरिमामय होता है। यदि उन्हें ही अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जाएगा या उनके भाषण को बार-बार बाधित किया जाएगा, तो जनता की आवाज सदन तक कैसे पहुँचेगी?

बड़ी समस्या (The Larger Problem): उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि एक व्यापक समस्या है जहाँ असहमति के सुरों को दबाया जा रहा है। इससे संसद की प्रासंगिकता खत्म होने का डर है।

राहुल गांधी का बचाव: थरूर ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे (जैसे बेरोजगारी, नीट पेपर लीक और किसान संकट) उठा रहे हैं, जिससे सरकार असहज महसूस कर रही है।

सदन में टकराव की स्थिति

हाल के दिनों में संसद में कई ऐसे मौके आए जब राहुल गांधी के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने हस्तक्षेप किया या उनके कुछ अंशों को सदन की कार्यवाही (Record) से हटाने की मांग की गई।

सत्ता पक्ष का तर्क: भाजपा और सहयोगी दलों का कहना है कि राहुल गांधी "तथ्यहीन" आरोप लगाते हैं और सदन का माहौल खराब करते हैं।

विपक्ष की एकजुटता: थरूर के इस बयान ने इंडिया (INDIA) गठबंधन के भीतर एकजुटता का संदेश दिया है, खासकर ऐसे समय में जब विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

संसदीय नियमों में 'नेता प्रतिपक्ष' का महत्व

भारतीय संसदीय प्रणाली में नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है। नियमों के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण बहस की शुरुआत और अंत में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का प्राथमिकता वाला अधिकार होता है।