भारत-अमेरिका की महा-डील जयशंकर और रूबियो की मुलाकात से ड्रैगन की बढ़ी टेंशन, टैरिफ में भारी कटौती और 500 अरब डॉलर का दांव

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News India Live, Digital Desk: दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां, भारत और अमेरिका, अब एक नए आर्थिक युग में कदम रख चुकी हैं। वॉशिंगटन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में उस 'ट्रेड डील' को औपचारिक रूप दिया गया, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद की गई थी। इस समझौते को 'मेक इन इंडिया' के लिए अब तक की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।

टैरिफ में 18% की गिरावट: भारतीय सामानों के लिए खुले अमेरिकी दरवाजे

इस डील की सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ (शुल्क) को 25% से घटाकर 18% कर दिया है।

किसे होगा फायदा: कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), समुद्री उत्पाद (Marine Products) और केमिकल क्षेत्र के निर्यातकों को अब अमेरिकी बाजार में सीधा लाभ मिलेगा।

शून्य ड्यूटी एक्सेस: लगभग 40 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय सामानों को अब अमेरिका में 'जीरो ड्यूटी' एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।

500 अरब डॉलर का निवेश: भारत खरीदेगा अमेरिकी ऊर्जा और तकनीक

बदले में भारत ने भी अमेरिका के साथ व्यापारिक संतुलन बनाने के लिए बड़े वादे किए हैं। भारत अमेरिका से आने वाले ऊर्जा संसाधनों (Energy), कृषि उत्पादों (Farm Products), तकनीक और कोयले के लिए 500 अरब डॉलर खर्च करने को तैयार है।"यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं में विकास की रफ्तार बढ़ाएगा और 'ट्रस्टेड टेक्नोलॉजी' के क्षेत्र में हमारे संबंधों को और मजबूत करेगा।" — एस. जयशंकर, विदेश मंत्री

क्रिटिकल मिनरल्स: चीन की बादशाहत को चुनौती

जयशंकर और रूबियो की बातचीत का एक मुख्य केंद्र 'क्रिटिकल मिनरल्स' (Critical Minerals) रहा। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी इन खनिजों पर वर्तमान में चीन का कब्जा है। भारत और अमेरिका ने अब मिलकर माइनिंग, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने का संकल्प लिया है ताकि भविष्य की तकनीक के लिए चीन पर निर्भरता खत्म की जा सके।

कृषि और डेयरी पर भारत का सख्त रुख बरकरार

भले ही यह एक बड़ी डील है, लेकिन भारत ने अपने किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी 'एग्रीकल्चर सेंसिटिविटी' से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।