जयशंकर-रुबियो मुलाकात: ट्रेड डील से लेकर रूसी तेल तक, वॉशिंगटन में हुआ भारत-अमेरिका रिश्तों का नया आगाज

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वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच वॉशिंगटन में हुई पहली औपचारिक मुलाकात ने दोनों देशों के भविष्य की रणनीतिक दिशा तय कर दी है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब महज दो दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) की घोषणा की है।

रणनीतिक साझेदारी के 6 प्रमुख स्तंभ

विदेश मंत्री जयशंकर ने इस मुलाकात को "विस्तृत और सार्थक" बताया। बैठक में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के छह प्रमुख क्षेत्रों पर गहन मंथन हुआ:

व्यापार (Trade): नए व्यापार समझौते के क्रियान्वयन पर चर्चा।

ऊर्जा (Energy): ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण।

परमाणु सहयोग (Nuclear Cooperation): नागरिक परमाणु क्षेत्र में आगे बढ़ने की योजना।

रक्षा (Defence): रक्षा औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करना।

महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण में द्विपक्षीय सहयोग।

प्रौद्योगिकी (Technology): विश्वसनीय और सुरक्षित तकनीक का विस्तार।

मार्को रुबियो और 'आलोचक' बेसेन्ट का रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मोदी-ट्रंप की बातचीत की सराहना करते हुए कहा कि दोनों लोकतंत्र मिलकर नए आर्थिक अवसर खोलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट, जो अतीत में रूसी तेल आयात को लेकर भारत के कड़े आलोचक रहे हैं, उनके सुर भी इस बार बदले हुए नजर आए। बेसेन्ट ने आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाने और आर्थिक सुरक्षा पर जयशंकर के साथ रचनात्मक चर्चा की।

[Image: EAM S. Jaishankar and US Secretary of State Marco Rubio shaking hands at the State Department in Washington DC, with Indian and US flags in the background]

मोदी-ट्रंप 'ट्रेड डील' के मुख्य बिंदु

2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित इस समझौते ने द्विपक्षीय व्यापार की दिशा बदल दी है:

टैरिफ में कटौती: अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है।

रूसी तेल का मुद्दा: रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने रूसी तेल की निर्भरता कम करने और अमेरिका/वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है।

भारत का वादा: पीएम मोदी ने 'बाय अमेरिकन' नीति के तहत अमेरिका से $500 अरब से ज्यादा की ऊर्जा, कोयला और तकनीक खरीदने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

जीरो टैरिफ का लक्ष्य: अमेरिका के अनुसार, भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को शून्य (Zero) करने की दिशा में काम करेगा।

भविष्य की राह: 'क्वाड' और इंडो-पैसिफिक

दोनों नेताओं ने क्वाड (Quad) के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की कसम खाई। रुबियो और जयशंकर ने माना कि एक समृद्ध और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दोनों देशों के साझा हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।