छत्तीसगढ़ में श्रद्धा बनी हैवानियत काली पूजा में बकरी की बलि दी जा रही थी, पर जब सच्चाई सामने आई तो रूह कांप गई

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के शांत गाँवों में जब पूजा-अर्चना की घंटी बजती है, तो सुकून मिलता है। लेकिन  हाल ही में जो खबर सामने आई है, उसने न केवल भक्ति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सभ्य समाज के सीने में भी एक डर पैदा कर दिया है। यह कहानी कवर्धा (कबीरधाम) इलाके की है, जहाँ माता काली की पूजा के दौरान एक ऐसी खौफनाक वारदात हुई कि वहां मौजूद हर शख्स की आँखों के आगे अंधेरा छा गया।

वो खौफनाक पल: जब पूजा बदल गई चीख-पुकार में

घटना उस समय की है जब माता काली की उपासना के नाम पर तांत्रिक क्रियाएं या पारंपरिक अनुष्ठान चल रहे थे। रीति-रिवाज के अनुसार वहाँ एक पशु (बकरी) की बलि दी जानी थी। गाँव के लोग अपनी श्रद्धा में मगन थे। लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसे जानकर कोई भी सिहर जाए। खबरों की मानें तो जिस 'बलि' को बकरी का नाम दिया जा रहा था, उसके पीछे की हकीकत जब खुली, तो वहाँ मातम पसर गया।

अक्सर ऐसे मामलों में देखा गया है कि अंधविश्वास में डूबे लोग सही और गलत की समझ खो देते हैं। इस घटना ने भी यह साफ़ कर दिया कि जब तक समाज से अंधविश्वास की जड़ें नहीं कटेंगी, ऐसी विचलित करने वाली खबरें आती रहेंगी।

सच्चाई आई सामने, तो उड़े सबके होश

जैसे ही पूजा संपन्न होने वाली थी और बलि की प्रक्रिया आगे बढ़ी, वहां कुछ लोगों को शक हुआ। जब पास जाकर देखा गया, तो पता चला कि जिसे बकरी समझकर भगवान को चढ़ाने की तैयारी थी, असलियत में मामला कुछ और ही था (वहाँ इंसानी जान को खतरा पैदा किया गया या उसे नुकसान पहुँचाया गया था)। जैसे ही ये बात फैली, भगदड़ मच गई। श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखते ही देखते अपराध और खौफ की गवाह बन गया।

पुलिस की एंट्री और सन्नाटे में डूबा गाँव

सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुँचे। जाँच की बारीकियों को देखते हुए पूरा इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है और उन तांत्रिकों या पुजारियों की तलाश शुरू कर दी है जो इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य पात्र थे। गाँव में फिलहाल सन्नाटा है। वो गलियाँ जो पूजा के गीतों से गूंजनी चाहिए थीं, आज वहां सिर्फ खामोश साया और पुलिस की गाड़ियों के साइरन सुनाई दे रहे हैं।

सवाल अंधविश्वास और समाज का?

आज हम साल 2026 की दहलीज़ पर खड़े हैं। मंगल पर बस्ती बसाने और एआई (AI) की दुनिया में आगे बढ़ने की बातें हो रही हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ की ये घटना हमें वापस खींचकर ले जाती है उस काले इतिहास में, जहाँ धर्म के नाम पर इंसानी खून की मांग की जाती थी। आखिर कब तक बेगुनाहों को इन खोखली परंपराओं की बलि चढ़ाया जाता रहेगा?

निष्कर्ष: सचेत रहें, अंधविश्वास नहीं

पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। लेकिन एक ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर हमारा फ़र्ज़ है कि हम अपने आस-पास ऐसी गतिविधियों पर नज़र रखें। धर्म सुकून के लिए है, डर या हत्या के लिए नहीं।

अगर आपको भी अपने आस-पास कोई तांत्रिक या ऐसा शख्स दिखे जो बलि या नुकसान की बातें कर रहा हो, तो तुरंत अधिकारियों को सूचित करें। आपका एक सजग कदम किसी की जान बचा सकता है।