सरकारी जमीन पर कब्जा किया तो अब लेखपाल साहब भी नहीं बचा पाएंगे, लखनऊ में लापरवाही पर जो एक्शन हुआ

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News India Live, Digital Desk: बात तो सीधी है, अगर प्रशासन चाहे तो परिंदा भी पर नहीं मार सकता। लखनऊ में लंबे समय से सरकारी जमीन और तालाबों पर अवैध कब्जों की शिकायतें मिल रही थीं। डीएम सूर्यपाल गंगवार ने इसके लिए साफ आदेश दिए थे कि जहाँ भी अवैध निर्माण या कब्जे दिखें, उन्हें फौरन हटाया जाए। लेकिन हुआ क्या? निचले स्तर पर बैठे कुछ अधिकारी—लेखपाल और कानूनगोमानों ठान कर बैठे थे कि काम को ढंडे बस्ते में ही डालना है।

जब बार-बार चेतावनी के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखा, तो डीएम का पारा चढ़ना लाजमी था। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित लेखपाल और कानूनगो के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दे दिए। डीएम ने साफ़ लफ्जों में कहा कि जो लोग अपनी ड्यूटी निभाने के बजाय कब्जा करने वालों को फायदा पहुंचा रहे हैं या रिपोर्ट बनाने में जानबूझकर देरी कर रहे हैं, उन्हें सिस्टम का हिस्सा नहीं रहने दिया जाएगा।

सरकारी सिस्टम में 'जीरो टॉलरेंस' का सन्देश
लखनऊ में ये कोई छोटी कार्रवाई नहीं है। आम तौर पर बड़े कब्जों पर बुलडोजर चलता हुआ दिखता है, लेकिन ये कार्रवाई बुलडोजर से भी बड़ी है। ये 'जवाबदेही' (Accountability) की कार्रवाई है। जब विभाग के ही सबसे निचले और मज़बूत कड़ी यानी लेखपाल और कानूनगो को यह पता होता है कि उनकी नौकरी और प्रोफाइल पर डीएम की सीधी नज़र है, तो काम की रफ्तार अपने आप बढ़ जाती है।

आम जनता को बड़ी राहत की उम्मीद
लखनऊ की गलियों में चर्चा है कि अगर इसी तरह ऊपरी अधिकारी सख्ती दिखाते रहे, तो सरकारी जमीनों से कब्जे भी हटेंगे और गरीबों के हक़ की जमीन सुरक्षित रहेगी। अब देखना ये है कि इस कार्रवाई के बाद क्या सच में भू-माफिया बैकफुट पर आते हैं? ज़ाहिर है, डीएम के इस एक्शन से ये मैसेज तो चला गया है कि प्रशासन के काम में सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जो लोग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर सरकारी प्रॉपर्टी को अपनी बपौती समझ बैठे थे, उनके लिए ये खबर किसी झटके से कम नहीं है। अब अधिकारियों के पास एक ही रास्ता बचा है या तो जमीन पर उतरकर कब्जों को हटाएं, या फिर सस्पेंशन और विभागीय जांच झेलने के लिए तैयार रहें।