नेताओं के लेट-लतीफ रवैये पर चला हंटर, संसद में लेट पहुँचने वाले सांसदों की कटेगी सैलरी?
News India Live, Digital Desk: हम और आप जब ऑफिस में 10 मिनट भी लेट होते हैं, तो बॉस की नजरें और सैलरी कटने का डर हमें बेचैन कर देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन नेताओं को हम देश चलाने के लिए चुनते हैं, अगर वे लेट आएँ तो क्या होगा? अब तक शायद इसका कोई कड़ा जवाब नहीं था, लेकिन खबर है कि संसद की कार्यवाही में सुधार के लिए अब 'नियमों की छड़ी' घूमने वाली है।
मामला क्या है?
अक्सर देखा जाता है कि जब संसद का सत्र चल रहा होता है, तो कई माननीय सांसद अपनी कुर्सी पर वक्त पर नहीं होते। सदन खाली रहता है और काम रुका रहता है। इसी को देखते हुए अब सख्त नियम बनाने की चर्चा है। अगर सांसद तय समय पर पार्लियामेंट के भीतर अपनी सीट पर मौजूद नहीं होते, तो उनकी हाजिरी को 'एब्सेंट' यानी अनुपस्थित मान लिया जाएगा।
जेब पर कैसे पड़ेगी मार?
ये सिर्फ नाम के लिए एब्सेंट होना नहीं होगा। इसका सीधा असर उनकी जेब पर भी पड़ेगा। दरअसल, सांसदों को सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए एक तय 'दैनिक भत्ता' (Daily Allowance) और सैलरी के हिस्से मिलते हैं। नए नियम के तहत, अगर सांसद वक्त पर नहीं आए और उनकी एब्सेंट लग गई, तो उस दिन का भुगतान रोक दिया जाएगा या उसमें कटौती की जाएगी।
क्या ये अनुशासन जरूरी था?
आम आदमी का सोचना सीधा है—जब एक प्राइवेट कर्मचारी या सरकारी नौकरशाह के लिए 'पंचिंग टाइम' इतना ज़रूरी है, तो देश के कानून बनाने वालों के लिए क्यों नहीं? अक्सर कोरम (सांसदों की न्यूनतम मौजूदगी) पूरा न होने की वजह से सदन की कार्यवाही टल जाती है। इससे टैक्सपेयर्स का करोड़ों रुपया और देश का कीमती समय बर्बाद होता है।
सख्त संदेश देने की तैयारी
अगर ये नियम पूरी सख्ती से लागू होते हैं, तो सांसदों के बीच एक अनुशासन पैदा होगा। अब केवल हाजिरी रजिस्टर पर साइन कर देना काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें पूरे वक्त अपनी सीट पर डटकर चर्चा का हिस्सा बनना होगा। यह कदम लोकतंत्र को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।
अब देखना ये होगा कि देश को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले नेता, खुद इन नियमों का पालन कितनी ईमानदारी से करते हैं!