गुजरात में फिर पटेल पावर की वापसी? 2027 से पहले आनंदीबेन ने चला अपनी बेटी अनर का दांव, क्या होगा बड़ा फेरबदल?

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News India Live, Digital Desk : आजकल चर्चा में हैं अनर पटेल। नाम तो आपने सुना ही होगा, गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और फिलहाल उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की बेटी। पिछले कुछ समय से अनर जिस तरह से लोगों के बीच जा रही हैं और जिस तरह की मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ है, उसने राज्य के सियासी गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज कर दी है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में कोई बहुत बड़ा धमाका होने वाला है?

सोशल वर्क या चुनावी जमीन तैयार करना?
अनर पटेल का वैसे तो खुद का बड़ा बिज़नेस और सोशल वर्क रहा है, लेकिन अब उनकी इस सक्रियता को 'समाज सेवा' के साथ-साथ 'सियासी पिच' तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है। आनंदीबेन पटेल की साख गुजरात, खास तौर पर पाटीदार समाज में कितनी बड़ी है, यह बताने की ज़रूरत नहीं है। ऐसे में उनकी बेटी का आगे आना इस ओर इशारा करता है कि आनंदीबेन अपनी विरासत को अब एक सुरक्षित और मजबूत हाथ में सौंपने की तैयारी में हैं।

क्या बीजेपी के लिए ये 'बड़ा जुआ' होगा?
साल 2027 का चुनाव बीजेपी के लिए उतना ही अहम है जितना कि 2014 का लोकसभा चुनाव था। वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल एक साफ-सुथरे चेहरे के तौर पर काम कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर भी कई 'पावर सेंटर्स' होते हैं। अनर पटेल की एंट्री अगर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से होती है, तो यह पटेल वोट बैंक को और ज्यादा संगठित करने का एक बड़ा हथियार बन सकता है।

अक्सर कहा जाता है कि मोदी-शाह की जोड़ी के सबसे विश्वसनीय लोगों में से एक आनंदीबेन रही हैं। अगर अनर पटेल को आगे बढ़ाया जाता है, तो यह माना जाएगा कि यह कदम कहीं न कहीं आलाकमान की रजामंदी से ही लिया जा रहा है।

गुजरात की जनता क्या सोचती है?
अहमदाबाद के सड़कों से लेकर गाँवों की चौपालों तक, पाटीदार समाज में एक बार फिर उस पुराने दबदबे की यादें ताज़ा हो रही हैं जो आनंदीबेन के दौर में हुआ करता था। अनर पटेल अपनी माँ की तरह कड़क नहीं बल्कि सहज स्वभाव के लिए जानी जाती हैं, जो युवाओं और महिलाओं के बीच अपनी अलग पैठ बना सकती हैं।

2027 की असली चुनौती
विपक्ष जिस तरह से घेराबंदी कर रहा है, उसे देखते हुए बीजेपी के लिए नया 'समीकरण' बिठाना ज़रूरी हो गया है। आनंदीबेन की छत्रछाया में अनर की वापसी से न केवल पुराने वफादारों को एकजुट किया जा सकता है, बल्कि पार्टी के भीतर उठ रही असंतुष्ट आवाजों को भी थामा जा सकता है।

अभी तो ये शुरुआत है। देखना दिलचस्प होगा कि जैसे-जैसे 2027 नज़दीक आता है, शतरंज के ये मोहरे किस चाल के साथ शह और मात का खेल शुरू करते हैं।

आप क्या सोचते हैं?
क्या अनर पटेल का राजनीति में आना गुजरात के पटेल समाज को फिर से उसी पुरानी स्थिति में खड़ा कर पाएगा? क्या 2027 के चुनाव में परिवारवाद से ज़्यादा विरासत की जंग होगी? कमेंट्स में अपनी राय जरूर दें!