उत्तर बनाम दक्षिण? सिद्धारमैया ने छेड़ी नई बहस, बोले आबादी कंट्रोल की तो क्या हमारी लोकसभा सीटें कम कर दी जाएंगी?
News India Live, Digital Desk : भारतीय राजनीति में इन दिनों एक ऐसा मुद्दा गर्माया हुआ है जो केवल चुनावी हार-जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के नक्शे और संसद की मजबूती से जुड़ा है। मामला है 'परिसीमन' (Delimitation)। इस शब्द ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया समेत दक्षिण भारत के कई नेताओं की नींद उड़ा दी है।
पूरी कहानी क्या है? सरल भाषा में समझिए
सीधे शब्दों में कहें तो 'परिसीमन' का मतलब है कि देश की आबादी के हिसाब से यह तय करना कि किस राज्य में कितनी लोकसभा और विधानसभा सीटें होंगी। कायदे से तो जिस राज्य की जितनी ज्यादा आबादी, उतनी ज्यादा सीटें। लेकिन यही बात दक्षिण भारत के राज्यों को परेशान कर रही है।
कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने एक बड़ी ही वाजिब चिंता जताई है। उनका कहना है कि दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु) ने बीते दशकों में परिवार नियोजन और आबादी को नियंत्रित करने पर बहुत अच्छा काम किया है। वहां शिक्षा बढ़ी और लोग जागरूक हुए। अब अगर केवल 'आबादी' को ही सीटों का आधार बनाया गया, तो जिन राज्यों ने अपनी आबादी बढ़ा ली (खासकर उत्तर भारत के कुछ राज्य), उन्हें इनाम के तौर पर ज्यादा लोकसभा सीटें मिलेंगी। वहीं, जिन्होंने देश के विकास में योगदान दिया और जनसंख्या पर लगाम कसी, उनकी सीटें कम हो जाएंगी।
यह सिर्फ सीटों का नहीं, ताकत का भी मामला है
सिद्धारमैया का डर ये है कि अगर संसद में दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व (Seats) कम होता है, तो केंद्र सरकार के फैसलों में उनकी राय की अहमियत भी कम हो जाएगी। दिल्ली के गलियारों में उनकी बात अनसुनी की जा सकती है। इसे एक तरह से 'अच्छे काम के लिए मिली सजा' के तौर पर देखा जा रहा है। दक्षिण भारत से आने वाला टैक्स देश के विकास में बड़ा योगदान देता है, ऐसे में वहां के नेताओं का मानना है कि उन्हें हाशिए पर नहीं धकेला जाना चाहिए।
क्या है रास्ता?
राजनीतिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल जनसंख्या को ही पैमाना बनाना शायद नाइंसाफी होगी। क्या शिक्षा, आर्थिक विकास और सामाजिक सुधारों को सीटों के बंटवारे में कोई जगह मिलेगी? यह एक बड़ा सवाल है। सिद्धारमैया की यह चेतावनी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के लिए एक संकेत है कि देश के संघीय ढांचे को बचाए रखने के लिए कोई ऐसा बीच का रास्ता निकालना होगा जिससे किसी का हक न मारा जाए।
फिलहाल, परिसीमन का यह मुद्दा आने वाले समय में देश की राजनीति की सबसे बड़ी गर्माहट रहने वाला है। अब देखना यह होगा कि केंद्र इस 'साउथ' की चिंता का क्या समाधान निकालता है।