मालविका मोहनन का बड़ा सवाल, क्या हमारी फ़िल्में कभी सुपरस्टार हीरोज की परछाई से बाहर निकल पाएंगी?

Post

News India Live, Digital Desk: अक्सर हम पर्दे पर बड़ी-बड़ी मसाला फ़िल्में देखते हैं, जहाँ हीरो सैकड़ों गुंडों को पीटता है और अंत में जीत हासिल करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वैसी ही धाकड़ फ़िल्में किसी एक्ट्रेस को लेकर क्यों नहीं बनतीं? या अगर बनती भी हैं, तो उन्हें फाइनेंस करने के लिए प्रोड्यूसर्स क्यों नहीं मिलते?

हाल ही में साउथ की पॉपुलर एक्ट्रेस मालविका मोहनन ने एक इंटरव्यू में कुछ ऐसी बातें कही हैं, जो आज के समय में फिल्म इंडस्ट्री के बदलते (या न बदलते) स्वरूप पर बड़ा सवाल उठाती हैं। मालविका अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं और इस बार उन्होंने सीधे-सीधे मेल एक्टर्स और प्रोड्यूसर्स के नजरिए पर हमला बोला है।

प्रोड्यूसर्स की वो एक 'हिचक'
मालविका ने एक कड़वी हकीकत बयां की। उन्होंने कहा कि आज भी अगर कोई दमदार कहानी ऐसी है जिसमें लीड रोल एक महिला का है, तो प्रोड्यूसर्स उस पर पैसा लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। उनका कहना है कि मेकर्स को लगता है कि बिना किसी 'मशहूर मेल हीरो' के फिल्म को खरीदेगा कौन? मालविका के मुताबिक, लोग प्रयोग करने से और पैसा डूबने के डर से अपनी फिल्मों के कॉन्टेंट में बड़ा बदलाव नहीं करना चाहते।

हीरोज क्यों कहते हैं 'नो'?
मालविका ने जो सबसे चौंकाने वाली बात कही, वो थी मेल एक्टर्स का रवैया। उन्होंने इशारा किया कि अगर फिल्म की कहानी में लड़की का किरदार बहुत मजबूत है या वो कहानी की असल जान है, तो अक्सर बड़े मेल स्टार्स उन प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने से मना कर देते हैं। कहीं न कहीं ये उनकी असुरक्षा को दिखाता है। ऐसा लगता है कि वो सिर्फ उसी फ्रेम में रहना चाहते हैं जहाँ लाइमलाइट पूरी तरह उन पर हो।

सिर्फ ग्लैमर के लिए नहीं हैं एक्ट्रेस!
आमतौर पर फिल्मों में हिरोइनों को सिर्फ डांस या कुछ गानों के लिए रखा जाता है। मालविका मानती हैं कि अब समय आ गया है कि कहानियों को सिर्फ एक चश्मे से न देखा जाए। उन्होंने ये भी जोड़ा कि कई एक्टर्स तो यहाँ तक कह देते हैं कि वे ऐसी फ़िल्में नहीं कर सकते जहाँ उन्हें 'बैकसीट' लेनी पड़े।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मालविका का ये बयान अब तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ का कहना है कि बात तो सौ फीसदी सच है, वहीं कुछ का मानना है कि सिनेमा आखिरकार एक बिज़नेस है और जो बिकता है, वही बनता है।

पर सोचने वाली बात ये है कि अगर सुपरस्टार्स ही अपनी कुर्सी छोड़कर नए तरीके की कहानियों को सपोर्ट नहीं करेंगे, तो फिल्म इंडस्ट्री में असल बदलाव आएगा कैसे? मालविका मोहनन ने तो अपना स्टैंड साफ कर दिया है, अब देखना ये है कि क्या उनके इस सवाल पर कोई मेल एक्टर चुप्पी तोड़ता है।

आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या वाक़ई हीरो का ईगो फिल्म की स्क्रिप्ट से बड़ा हो गया है?