Hip Mobility: कुर्सी पर चिपके रहने से कूल्हों में आ गई है अकड़न? इन 14 योगासनों से शरीर को बनाएं लचीला, पीठ दर्द से मिलेगी तुरंत राहत

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हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली में घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना हमारी सेहत के लिए भारी पड़ रहा है। लगातार बैठे रहने से कूल्हों की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, जिसका सीधा असर हमारी चाल, मुद्रा (Posture) और रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कूल्हों की अकड़न केवल बेचैनी ही नहीं पैदा करती, बल्कि यह पुराने कमर दर्द का भी मुख्य कारण है। योग विज्ञान में कूल्हों को लचीला बनाने के लिए विशेष आसनों का वर्णन है, जो मांसपेशियों के तनाव को दूर कर शरीर को नई ऊर्जा देते हैं। आइए जानते हैं कूल्हों के 'हिप फ्लेक्सर्स' को खोलने वाले 14 सबसे प्रभावी योगासन।

कूल्हों को खोलने के लिए सबसे प्रभावी योगासन

1. बाल आसन (Balasana - Child's Pose)

शुरुआत करने के लिए यह सबसे बेहतरीन आसन है। यह पीठ के निचले हिस्से और कूल्हों को धीरे से स्ट्रेच करता है।

कैसे करें: घुटनों के बल बैठें और पीछे की ओर झुककर नितंबों को एड़ियों पर टिकाएं। हाथों को आगे फैलाएं और माथा ज़मीन पर रखें।

लाभ: जांघों की मांसपेशियों को ढीला करता है और मन को शांत करता है।

2. कबूतर मुद्रा (Pigeon Pose - Eka Pada Rajakapotasana)

यह कूल्हे खोलने के लिए सबसे गहरा और प्रभावी स्ट्रेच माना जाता है।

कैसे करें: एक घुटना आगे मोड़ें और दूसरा पैर पीछे सीधा फैलाएं। धीरे-धीरे कूल्हों को ज़मीन की ओर लाएं।

लाभ: यह नितंबों और पीठ के निचले हिस्से के गहरे तनाव को दूर करता है।

3. छिपकली मुद्रा (Lizard Pose - Utthan Pristhasana)

यह आसन हिप फ्लेक्सर्स और 'ग्रोइन एरिया' की जकड़न को खत्म करने में कारगर है।

कैसे करें: हाई प्लैंक पोजीशन से एक पैर आगे लाएं और हाथों के बाहर रखें। पीछे के पैर को सीधा रखते हुए हिप्स को नीचे लाएं।

4. तितली मुद्रा (Butterfly Pose - Baddha Konasana)

यह आंतरिक जांघों के लचीलेपन के लिए रामबाण है।

कैसे करें: तलवों को आपस में मिलाकर बैठें और घुटनों को ज़मीन के करीब लाएं।

लाभ: कूल्हे के जोड़ों में जगह बनाता है और गतिशीलता बढ़ाता है।

5. सुप्त बद्ध कोणासन (Reclining Bound Angle Pose)

यह शरीर को आराम देने और कूल्हों को प्राकृतिक रूप से स्ट्रेच करने का सबसे आसान तरीका है।

कैसे करें: पीठ के बल लेटकर तितली मुद्रा बनाएं और घुटनों को फर्श की ओर गिरने दें।

6. हैप्पी बेबी पोज़ (Happy Baby Pose - Ananda Balasana)

यह आसन कूल्हों के साथ-साथ जांघों के अंदरूनी हिस्से को स्ट्रेच कर रीढ़ की हड्डी को रिलैक्स करता है।

कैसे करें: पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती की ओर लाएं और पैरों के बाहरी किनारों को हाथों से पकड़कर नीचे की ओर दबाएं।

7. लो लंज (Low Lunge - Anjaneyasana)

यह आसन पैरों की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ कूल्हों को लंबा खिंचाव देता है।

कैसे करें: एक पैर आगे और पीछे का घुटना ज़मीन पर टिकाकर कूल्हों को आगे की ओर धकेलें।

8. क्रेसेंट लंज (Crescent Lunge)

यह संतुलन और कोर स्टेबिलिटी को बेहतर बनाने में मदद करता है।

कैसे करें: लो लंज जैसी मुद्रा, लेकिन पीछे का पैर सीधा और एड़ी ज़मीन से ऊपर रखें।

9. मलासन (Squat Pose - Malasana)

कूल्हों की गतिशीलता के लिए यह पारंपरिक भारतीय बैठक मुद्रा सबसे उत्तम है।

कैसे करें: पैरों को चौड़ा करके उकड़ू बैठें और हथेलियों को जोड़कर कोहनियों से घुटनों को बाहर धकेलें।

10. पश्चिमोत्तानासन (Seated Forward Bend)

कैसे करें: ज़मीन पर पैर फैलाकर बैठें और कूल्हों से आगे झुककर पैरों को छूने की कोशिश करें।

लाभ: यह हैमस्ट्रिंग और कूल्हों के पिछले हिस्से के तनाव को कम करता है।

11. परिवृत्त अंजनेयासन (Twisted Lunge)

कैसे करें: लो लंज में शरीर के ऊपरी हिस्से को मुड़े हुए पैर की ओर मोड़ें (ट्विस्ट करें)।

लाभ: यह रीढ़ की हड्डी और कूल्हों के बीच के लचीलेपन को बढ़ाता है।

12. योद्धा II (Warrior II - Virabhadrasana II)

कैसे करें: पैरों को दूर फैलाकर एक घुटने को 90 डिग्री पर मोड़ें और हाथों को बगल में फैलाएं।

लाभ: कूल्हे और छाती की गतिशीलता में सुधार और संतुलन बढ़ाता है।

13. मेंढक मुद्रा (Frog Pose - Mandukasana)

यह जांघों के अंदरूनी हिस्से के लिए एक तीव्र और गहरा स्ट्रेच है।

कैसे करें: घुटनों को चौड़ा फैलाकर ज़मीन पर टिकाएं और कूल्हों को पीछे की ओर धकेलें।

14. बाउंड एंगल पोज़ (Baddha Konasana Variation)

यह बैठकर किया जाने वाला स्थिर स्ट्रेच है जो ग्रोइन की मांसपेशियों को लचीला बनाता है।