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April 19 2026 02:49 am

Chronic Inflammation: शरीर की अंदरूनी सूजन बन सकती है बीमारियों की जड़! इन 4 योगासनों से नसों को दें आराम, दर्द और अकड़न होगी छूमंतर

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हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। क्रोनिक इन्फ्लेमेशन यानी शरीर के अंदरूनी हिस्सों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन एक ऐसी 'खामोश' समस्या है, जो जोड़ों में जकड़न, लगातार थकान और पाचन में गड़बड़ी पैदा करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं के साथ-साथ 'जेंटल मूवमेंट' यानी धीमा शारीरिक व्यायाम शरीर की रिकवरी के लिए बेहद जरूरी है। योग के ये सूक्ष्म खिंचाव न केवल नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं, बल्कि रक्त संचार (Circulation) को बेहतर बनाकर शरीर की सूजन कम करने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं वे 4 थेराप्यूटिक योगासन जो आपको अंदर से स्वस्थ बनाएंगे।

सूजन कम करने में योग कैसे है मददगार?

इन्फ्लेमेशन का गहरा संबंध पुराने तनाव और शरीर की जकड़न से होता है। जब शरीर तनाव में रहता है, तो स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सूजन को और गंभीर बना देता है। योग के ये सरल आसन 'रेस्ट-एंड-रिपेयर' रिस्पॉन्स को सक्रिय करते हैं, जिससे मांसपेशियों को आराम मिलता है और रक्त प्रवाह में सुधार होता है।

1. बालासन (Child’s Pose): संपूर्ण शरीर को दें आराम

यह आसन तनाव और थकान से जुड़ी सूजन को शांत करने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है।

कैसे करें: घुटनों के बल बैठें और पीछे झुककर नितंबों को एड़ियों पर रखें। आगे झुकते हुए माथे को ज़मीन पर टिकाएं और हाथों को आगे की ओर फैलाएं। इस स्थिति में 1 से 3 मिनट तक रहें।

लाभ: यह रीढ़ की हड्डी और कूल्हों के तनाव को मुक्त करता है। साथ ही, पेट पर पड़ने वाला हल्का दबाव पाचन तंत्र को सुधारता है, जो सूजन कम करने में बड़ी भूमिका निभाता है।

2. सपोर्टेड ब्रिज पोज़ (Supported Bridge Pose): जोड़ों के दर्द में राहत

यह आसन रीढ़ या जोड़ों पर दबाव डाले बिना रक्त संचार को बढ़ावा देता है।

कैसे करें: पीठ के बल लेटें और घुटने मोड़ें। अपने कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाकर उनके नीचे योग ब्लॉक या सख्त कुशन रखें। अपने शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें और 1 से 2 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।

लाभ: यह पेल्विक क्षेत्र और रीढ़ में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे जोड़ों की संवेदनशीलता और पुराने दर्द में कमी आती है।

3. पश्चिमोत्तानासन (Seated Forward Fold): नर्वस सिस्टम को करे शांत

यदि आपकी सूजन ऑटोइम्यून या पाचन संबंधी समस्याओं से जुड़ी है, तो यह आसन आपके लिए जादुई साबित हो सकता है।

कैसे करें: ज़मीन पर पैर फैलाकर बैठें और धीरे-धीरे कूल्हों से आगे झुकें। हाथों को पैरों की ओर बढ़ाएं और गर्दन को ढीला छोड़ दें। 1 मिनट तक गहरी सांस लें।

लाभ: यह आंतरिक अंगों की हल्की मालिश करता है और मानसिक तनाव को कम कर इन्फ्लेमेशन के 'ट्रिगर्स' को शांत करता है।

4. सुप्त मत्स्येन्द्रासन (Supine Spinal Twist): डिटॉक्स में सहायक

रीढ़ की हड्डी के खिंचाव (Twist) शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और जकड़न दूर करने में मदद करते हैं।

कैसे करें: पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें। अपने दाएं घुटने को बाईं ओर जमीन की तरफ ले जाएं और गर्दन को दाईं ओर घुमाएं। कुछ देर रुकें और फिर दूसरी तरफ से दोहराएं।

लाभ: यह लोअर बैक की अकड़न कम करता है और लिम्फैटिक फ्लो (Lymphatic Flow) को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर की सफाई होती है।

जरूरी सलाह: तीव्रता से ज्यादा 'धीमी गति' पर दें ध्यान

इन्फ्लेमेशन के दौरान योग करते समय जबरदस्ती खिंचाव न करें। आपका ध्यान शरीर पर दबाव डालने के बजाय उसे 'आराम' देने पर होना चाहिए। सप्ताह में 5 से 6 दिन केवल 10 मिनट का अभ्यास भी आपके शरीर को भीतर से बदलने की ताकत रखता है।