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April 04 2026 11:13 am

रांची-लोहरदगा रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, जल्द दौड़ेगी एक और नई ट्रेन, रेलवे ने तैयार किया मास्टर प्लान

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News India Live, Digital Desk: झारखंड की राजधानी रांची और लोहरदगा के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। रेलवे ने इस रेलखंड पर यात्रियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए एक नई ट्रेन चलाने का प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दिया है। इस नई ट्रेन के शुरू होने से न केवल रांची और लोहरदगा के लोगों को फायदा होगा, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले छोटे स्टेशनों के यात्रियों के लिए भी आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।

DRM करुणानिधि सिंह ने दी जानकारी, वंदे भारत को लेकर भी बड़ा अपडेट

हटिया स्थित रेलमंडल कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीआरएम (DRM) करुणानिधि सिंह ने बताया कि रांची रेलमंडल के नेटवर्क में विस्तार की योजनाएं तेजी से चल रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी अब रांची रेलमंडल को मिल चुकी है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। लोहरदगा रूट पर नई ट्रेन चलाने का प्रस्ताव इसी विस्तार योजना का हिस्सा है, जिसे जल्द ही हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।

अमृत भारत योजना से संवर रहे स्टेशन, रांची यार्ड का हुआ कायाकल्प

डीआरएम ने बताया कि 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत रांची रेलमंडल के कई स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। पिस्का, मुरी और लोहरदगा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा, रांची स्टेशन के यार्ड की रिमॉडलिंग का काम भी अंतिम चरण में है। यार्ड में अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं, जो विशेष रूप से लोहरदगा की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए समर्पित होंगे। पिछले वित्तीय वर्ष में तीन नई लाइनें जोड़ी गई थीं, जबकि इस साल दो और नई लाइनें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

ट्रैक नवीनीकरण और यात्री सुविधाओं में रिकॉर्ड सुधार

पिछले एक साल में रांची रेलमंडल ने सुरक्षा और सुविधा के मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। लगभग 87 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण किया गया है, जिससे ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों में सुधार हुआ है। इसके अलावा, सभी प्रमुख स्टेशनों पर पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, यात्रियों की संख्या में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि सिग्नलिंग फेल होने की घटनाओं में 12 प्रतिशत तक की कमी आई है। इन सुधारों से भविष्य में ट्रेनों के परिचालन में और अधिक समयबद्धता देखने को मिलेगी।