Ganga-Jamuni Tehzeeb : सुलतानपुर के अहसान अली ने पेश की मिसाल मंदिर निर्माण के लिए दान कर दी अपनी कीमती जमीन

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News India Live, Digital Desk: जहाँ आज के दौर में जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए अपनों के बीच झगड़े आम हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले से भाईचारे की एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। जिले के अहसान अली ने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए प्राचीन 'मारी माई धाम' मंदिर के विस्तार के लिए अपनी निजी और कीमती जमीन खुशी-खुशी दान कर दी है।

क्या है पूरा मामला? (The Heartwarming Story)

सुलतानपुर जिले के जयसिंहपुर तहसील अंतर्गत आने वाले पीढ़ी गांव में 'मारी माई धाम' एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन मंदिर परिसर छोटा होने के कारण भक्तों को काफी असुविधा होती थी।

अहसान अली का बड़ा फैसला: मंदिर के ठीक बगल में अहसान अली की जमीन थी। जब उन्हें पता चला कि मंदिर के सौंदर्यीकरण और विस्तार के लिए जमीन की जरूरत है, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जमीन मंदिर समिति के नाम करने का निर्णय लिया।

रजिस्ट्री और कागजी कार्रवाई: अहसान अली ने आधिकारिक तौर पर जमीन की रजिस्ट्री मंदिर के नाम कर दी है, ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।

"इंसानियत और मोहब्बत सबसे ऊपर"

अपनी इस पहल पर अहसान अली का कहना है कि मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन ऊपर वाला एक ही है। उन्होंने कहा, "मारी माई हमारे गांव की आस्था का केंद्र हैं। अगर मेरी थोड़ी सी जमीन किसी नेक काम और मंदिर के विकास में काम आ सकती है, तो यह मेरा सौभाग्य है। हमें मिलकर रहना चाहिए और एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए।"

ग्रामीणों और मंदिर समिति ने जताया आभार

अहसान अली के इस कदम की न केवल गांव में, बल्कि पूरे जिले के प्रशासन और सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। मंदिर समिति के सदस्यों ने उन्हें सम्मानित किया और कहा कि यह कदम समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतों को करारा जवाब है। ग्रामीणों का मानना है कि इस जमीन के मिलने से अब धाम का विकास तेजी से हो सकेगा और आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

सांप्रदायिक सद्भाव की बढ़ती मिसालें

उत्तर प्रदेश में इस तरह की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं, जहाँ कभी हिंदू समुदाय ने कब्रिस्तान के लिए तो कभी मुस्लिम समुदाय ने मंदिर या गौशाला के लिए जमीन दान की है। अहसान अली की यह पहल इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाती है।