High Court Order : पटरी दुकानदारों को बड़ी राहत बिना सर्वे नहीं हटेंगी दुकानें, हाईकोर्ट ने योगी सरकार को दिया सख्त आदेश
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की सड़कों के किनारे रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों पटरी दुकानदारों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक राहत भरी खबर आई है। कोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया है कि 'स्ट्रीट वेंडर अधिनियम 2014' के तहत बिना उचित सर्वे किए किसी भी रेहड़ी-पटरी वाले को हटाया न जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस राहत के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है।
क्या है हाईकोर्ट का फैसला?
इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नगर निगम और स्थानीय निकाय अपनी मनमर्जी से दुकानदारों को बेदखल नहीं कर सकते।
सर्वे अनिवार्य: कोर्ट ने कहा कि जब तक वेंडिंग जोन और नॉन-वेंडिंग जोन का सर्वे पूरा नहीं हो जाता और दुकानदारों को प्रमाणपत्र (Certificate of Vending) जारी नहीं कर दिए जाते, तब तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
अधिनियम का पालन: कोर्ट ने प्रशासन को याद दिलाया कि 'स्ट्रीट वेंडर (आजीविका संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम, 2014' दुकानदारों को सुरक्षा प्रदान करता है।
कोर्ट ने लगाई एक 'कड़ी शर्त'
राहत देने के साथ ही हाईकोर्ट ने दुकानदारों और प्रशासन के सामने एक अनिवार्य शर्त भी रखी है:
"पटरी दुकानदार केवल वहीं दुकान लगा सकेंगे जहाँ से यातायात (Traffic) बाधित न हो। यदि किसी दुकानदार की वजह से सड़क पर जाम लग रहा है या पैदल चलने वालों को दिक्कत हो रही है, तो प्रशासन को उन्हें विनियमित (Regulate) करने का अधिकार होगा।"
इसका मतलब यह है कि सर्वे तक सुरक्षा तो मिलेगी, लेकिन ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर रियायत नहीं दी जाएगी।
क्यों अहम है यह फैसला?
अक्सर देखा जाता है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर पुलिस और नगर निगम की टीमें अचानक दुकानदारों का सामान जब्त कर लेती हैं या उन्हें हटा देती हैं। इस आदेश के बाद:
मनमानी पर रोक: प्रशासन अब बिना रिकॉर्ड के कार्रवाई नहीं कर पाएगा।
सर्टिफिकेट की ताकत: दुकानदारों को अपना पंजीकरण (Registration) कराने और सर्टिफिकेट प्राप्त करने का कानूनी आधार मिलेगा।
टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC): अब नगर निगमों को टाउन वेंडिंग कमेटी की बैठकों और सर्वे प्रक्रिया में तेजी लानी होगी।
दुकानदारों को अब क्या करना चाहिए?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पटरी दुकानदारों को अपनी स्थानीय नगर पालिका या नगर निगम में जाकर पंजीकरण की स्थिति चेक करनी चाहिए। यदि सर्वे अभी चल रहा है, तो उन्हें अपना नाम सूची में दर्ज कराना सुनिश्चित करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी कार्रवाई से बचा जा सके।