बांग्लादेश में वर्क परमिट रद्द करने की गूंज, क्या रिश्तों में सुधार की रही-सही उम्मीद भी खत्म हो रही है?
News India Live, Digital Desk : पिछले कुछ समय से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के बीच वो 'पुराने वाली' बात नहीं रही। शेख हसीना सरकार के जाने के बाद से वहां के हालात जिस तरह बदले हैं, उसका असर अब सीधा वहां रह रहे और काम कर रहे भारतीयों पर पड़ने लगा है। ताज़ा विवाद खड़ा हुआ है वहां के एक गुट, 'इंकलाब मंच' की उस मांग से, जिसमें वे भारतीयों के वर्क परमिट यानी वहां काम करने की कानूनी इजाजत को खत्म करने पर अड़ गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बांग्लादेश के 'इंकलाब मंच' नाम के एक कट्टरपंथी गुट ने हाल ही में मोर्चा खोला है कि देश में जितने भी भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं, उनका वर्क परमिट सस्पेंड कर दिया जाए। उनकी दलील है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन क्या हकीकत इतनी ही सरल है? एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ नौकरियों की बात नहीं, बल्कि भारत विरोध की उस भावना को हवा देने की कोशिश है जो पिछले कुछ महीनों से वहां बहुत तेज हुई है।
पूर्व राजनयिक ने क्यों कहा कि यह बांग्लादेश के लिए 'घाटे का सौदा' है?
इस पूरे विवाद पर भारत के पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ़ लफ़्जों में इसे बेतुकी मांग बताया। सच तो ये है कि बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग (Garment Industry) और आईटी सेक्टर की कामयाबी के पीछे बहुत हद तक भारतीय प्रोफेशनल और इंजीनियरों का हाथ रहा है। अगर वहां से भारतीयों को हटाया जाता है, तो ये किसी और का नहीं, बल्कि खुद बांग्लादेश का बड़ा नुकसान होगा। वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी काम इन विशेषज्ञों के बिना पटरी से उतर सकता है।
सियासी दांव-पेंच या खुद के पैर पर कुल्हाड़ी?
किसी भी पड़ोसी देश में जब नफरत का माहौल बनाया जाता है, तो उसका असर सीधे व्यापार और वहां रह रहे आम लोगों पर पड़ता है। बांग्लादेश की इकॉनमी फिलहाल वैसे भी बहुत अच्छे दौर से नहीं गुजर रही है। ऐसे में वहां रह रहे कुशल भारतीय पेशेवरों को निशाना बनाना किसी भी लिहाज से समझदारी नहीं लगती। अनिल त्रिगुणायत ने यह भी इशारा किया कि इस तरह की मांगों को हवा देना आने वाले समय में बांग्लादेश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल पैदा कर सकता है।
एक बड़ी चुनौती है वर्कफोर्स का ये संकट
एक तरफ बांग्लादेश चाहता है कि वो दुनिया का बड़ा सप्लाई हब बने, और दूसरी तरफ अपनी स्किल्ड वर्कफोर्स के खिलाफ ऐसे अभियान चला रहा है। सोशल मीडिया पर जिस तरह की 'बहिष्कार' (Boycott) की राजनीति चल रही है, उसका शिकार अब पेशेवर लोग भी हो रहे हैं। इससे वहां काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है।