एलन मस्क की राह पर चीनी रईस ,क्यों 100 बच्चों के पिता शू बो को चाहिए अमेरिका में जन्मे 20 और बच्चे?
News India Live, Digital Desk : आमतौर पर जब हम दुनिया के अरबपतियों के बारे में सुनते हैं, तो दिमाग में आलीशान बंगले, प्राइवेट जेट और लग्जरी गाड़ियों की बात आती है। लेकिन चीन के एक टेक अरबपति 'शू बो' (Xu Bo) कुछ अलग ही मिट्टी के बने हैं। उनकी चर्चा उनकी दौलत से ज्यादा उनके परिवार को लेकर हो रही है। यकीन करना मुश्किल है, लेकिन कहा जाता है कि उनके पहले से ही 100 से ज्यादा बच्चे हैं और उनका यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है।
क्या है शू बो की यह अजीबोगरीब चाहत?
चीनी गेमिंग कंपनी 'डुओ यी नेटवर्क' (Duo Yi Network) के संस्थापक शू बो का मानना है कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत 'आबादी' है। वे खुद को किसी खास मिशन पर समझते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और इंटरनेट पर मौजूद उनकी दास्तां बताती है कि उन्होंने अलग-अलग महिलाओं और सरोगेसी के जरिए एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया है—सिर्फ बिजनेस में ही नहीं, बल्कि अपने कुनबे में भी। वे अपने बच्चों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बेहतरीन परवरिश देना चाहते हैं ताकि उनकी जीन (Genes) आने वाले कल को बेहतर बना सकें।
अब अमेरिका में 20 और बच्चों का टारगेट?
शू बो की नई योजना ने सबको हैरान कर दिया है। बताया जा रहा है कि अब उनकी नजर अमेरिका पर है, जहाँ वे कम से कम 20 ऐसे बच्चे चाहते हैं जिनका जन्म अमेरिका की जमीन पर हो। इसके पीछे उनकी क्या मंशा है, यह तो वो ही जानें, लेकिन लोग इसे उनकी 'सोशल इंजीनियरिंग' का हिस्सा मान रहे हैं। उनका मानना है कि प्रतिभाशाली बच्चों की एक फौज खड़ी करके वे इंसानियत को विलुप्त होने से बचा सकते हैं।
एलन मस्क से क्या है कनेक्शन?
ये पूरी कहानी तब और दिलचस्प हो जाती है जब इसमें टेस्ला और एक्स (X) के मालिक एलन मस्क का नाम जुड़ता है। मस्क ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर कहा है कि 'आबादी का घटना' इंसानी सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। मस्क के खुद के 11-12 बच्चे हैं और वे और ज्यादा बच्चों के पक्ष में रहते हैं। शू बो भी मस्क के इस विचार के कट्टर समर्थक नजर आते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मस्क ने इस पर सिर्फ चर्चा की, जबकि शू बो इसे एक अलग ही लेवल पर ले गए हैं।
विवादों से पुराना नाता
जाहिर है, इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का होना विवादों को जन्म देगा ही। चीन में जहाँ लंबे समय तक 'वन चाइल्ड पॉलिसी' रही, वहां शू बो की यह सनक लोगों के गले नहीं उतर रही। आलोचकों का कहना है कि यह बच्चों को इंसानी जीवन न मानकर उन्हें किसी 'प्रोजेक्ट' या 'इन्वेस्टमेंट' की तरह देख रहे हैं। उन माताओं का क्या? उन बच्चों के बचपन का क्या? ये सवाल हाशिये पर हैं, और चर्चा में सिर्फ अरबपति का बढ़ता कुनबा है।
नैतिकता का बड़ा सवाल
राजनीति और बिजनेस से हटकर देखें तो यह पूरा मामला नैतिकता की सीमाएं लांघता हुआ नजर आता है। क्या कोई इंसान अपनी दौलत के दम पर दर्जनों जिंदगियों को बिना किसी परिवार के पारंपरिक ढांचे के सिर्फ इसलिए ला सकता है क्योंकि उसे लगता है कि उसके जींस श्रेष्ठ हैं? शू बो के लिए शायद यह सिर्फ आंकड़ों का खेल हो, लेकिन समाज और आने वाली पीढ़ी के लिए यह एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रयोग साबित हो सकता है।
फिलहाल, 2025 की इन सुर्ख़ियों में शू बो का नाम हर किसी को हैरान कर रहा है। देखना यह होगा कि उनका 'अमेरिकी मिशन' कितना कामयाब होता है और इस पर वहां के कानूनों का क्या रुख रहता है।